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ये 1962 नहीं, 2026 का भारत है! शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को लद्दाख के LG ने दी कड़ी चेतावनी

भारत ने चीन को शक्सगाम घाटी पर किए गए दावे पर कड़ा संदेश दिया है. लद्दाख के एलजी कविंदर गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 1962 का भारत नहीं है.

सरहद पर अपनी हरकतों से बाज नही आने वाले चीन को भारत ने एक बार फिर आईना दिखाया है. कश्मीर की ‘शक्सगाम घाटी’ (Shaksgam Valley) को लेकर चीन ने जो दावा ठोका है, उस पर भारत की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है. लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) कविंदर गुप्ता ने ड्रैगन को दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यह 1962 का भारत नहीं, बल्कि 2026 का सशक्त और नया भारत है, जो अपनी एक इंच जमीन के लिए भी झुकने वाला नहीं है.

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, चीन ने शक्सगाम घाटी पर अपना हक जताते हुए वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) को सही ठहराया है. चीन का कहना है कि यह उसका इलाका है और वहां वह कुछ भी बनाने के लिए स्वतंत्र है. लेकिन सच तो यह है कि यह पूरी जमीन भारत की है, जिसे पाकिस्तान ने दशकों पहले ‘खैरात’ में चीन को दे दिया था. भारत ने शुरू से ही इस सौदे को अवैध माना है.

LG कविंदर गुप्ता का कड़ा प्रहार

इस मसले पर लद्दाख के एलजी कविंदर गुप्ता ने चीन की विस्तारवादी नीति की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा, “चीन को यह गलतफहमी पालना छोड़ देना चाहिए कि वह अरुणाचल या कश्मीर के किसी हिस्से पर कब्जा कर लेगा. पूरा कश्मीर हमारा है और हमारी सेनाएं अपनी सीमा की रक्षा करना बखूबी जानती हैं.” उन्होंने साफ किया कि भारत का विदेश मंत्रालय इस पूरी हरकत पर नजर बनाए हुए है और देश की संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

चीन-पाकिस्तान की पुरानी जुगलबंदी

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक तथाकथित सीमा समझौता हुआ था. इसके तहत पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र (POK) में से 5,180 वर्ग किलोमीटर का शक्सगाम घाटी वाला हिस्सा चीन को सौंप दिया था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, “शक्सगाम घाटी हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रही है. हम 1963 के उस तथाकथित समझौते को कभी मान्यता नहीं देते. वह समझौता पूरी तरह से अवैध और अमान्य है.”

चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश और अब लद्दाख के इलाकों में घुसपैठ की कोशिश करता रहता है. लेकिन उपराज्यपाल गुप्ता की टिप्पणी ‘1962 बनाम 2026’ इस बात की ओर इशारा करती है कि आज का भारत तकनीकी, सैन्य और कूटनीतिक रूप से कहीं ज्यादा मजबूत है. भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों और सीमाओं की रक्षा के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, उन्हें उठाने में थोड़ा भी संकोच नहीं करेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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