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ग्रीन फैशन से बदलेगी देश की तस्वीर! पीएम मोदी बोले- ‘सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, भविष्य की जरूरत’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) भारत की परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहा है और अब यही सोच देश के टेक्सटाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया है कि सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की जरूरत बन चुका है. केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के एक लेख को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने देश के इस अहम सेक्टर में आ रहे बड़े बदलावों की खुलकर सराहना की है.

आजकल फैशन की दुनिया में रीसाइक्लिंग, क्लीनर प्रोडक्शन (स्वच्छ उत्पादन) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे शब्द बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री इन सभी आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर वैश्विक बाजार में खुद को और मजबूत बना रही है. इसका मतलब यह है कि पुराने या बेकार कपड़ों को फेंकने के बजाय उन्हें रीसायकल करके नए उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इससे कचरा कम होता है और एक ऐसी ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ तैयार होती है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आगे बढ़ती है.

आर्थिक तरक्की और पर्यावरण का अनूठा मेल

अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ चल सकते हैं? इस पर सरकार का रुख बिल्कुल साफ है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने यह साबित कर दिया है कि हमें इनमें से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. सरकार की कोशिशों का नतीजा है कि फाइबर, यार्न, फैब्रिक और तकनीकी वस्त्रों से लेकर परिधानों तक हर क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल मॉडल तेजी से अपनाए जा रहे हैं.

कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने लेख में रेखांकित किया है कि भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 350 अरब डॉलर के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग का मुकाम हासिल करना है. इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए बाजार की पहुंच और जिम्मेदार विकास, दोनों पर एक साथ काम किया जा रहा है.

रोजगार के मोर्चे पर बंपर उम्मीदें

भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश का घरेलू बाजार 2014-15 के लगभग 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 16 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो चुका है. यह छलांग इस बात का सबूत है कि यह क्षेत्र कितनी तेजी से तरक्की कर रहा है.

सबसे बड़ी बात यह है कि यह सेक्टर देश में आम जनता को बड़े पैमाने पर रोजगार दे रहा है. वर्तमान में कपड़ा और परिधान उद्योग 5.3 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का जरिया बना हुआ है. जानकारों और सरकारी अनुमानों के मुताबिक, आने वाले तीन सालों में इस क्षेत्र में करीब 2 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

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-भारत एक्सप्रेस



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