बैठक के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्यों पर विचार-विमर्श किया और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य भागीदारी वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए महत्वपूर्ण है.
इस द्विपक्षीय बातचीत ने सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन जैसे विषयों पर फोकस किया. साथ ही, दोनों पक्षों ने सेना से सेना के स्तर पर सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने, संयुक्त कार्य संचालन (joint operations) की क्षमताओं को बढ़ाने और रणनीतिक संवाद को लगातार जारी रखने पर बल दिया.
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने इस दौरान कहा कि भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच विश्वास, पेशेवर समर्पण और पारदर्शिता की एक मजबूत नींव तैयार हुई है, जो दोनों लोकतंत्रों के साझा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है. उन्होंने यह भी कहा कि ESG जैसे मंच दोनों देशों के बीच गहराई से जुड़े सैन्य रिश्तों को संस्थागत रूप देते हैं और सामरिक सोच को धरातल पर लाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
भविष्य के रक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाएं
लेफ्टिनेंट जनरल जेबी वोवेल ने भी भारतीय सेना के साथ गहराते संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज के लिए तत्पर है. उन्होंने यह भी कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत-अमेरिका सहयोग निर्णायक भूमिका निभा सकता है.
ESG बैठक इस बात का प्रमाण है कि भारत और अमेरिका केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित स्थायी मित्रता की ओर अग्रसर हैं. इस बैठक से न केवल दोनों सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने की रणनीति को भी मजबूती मिलेगी.
यह संवाद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो भविष्य में और भी गहरे सहयोग की नींव रखता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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