भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में चल रहे बहुपक्षीय अभ्यास “पैसिफिक रीच 2025” के दौरान अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया. इस अभ्यास में नौसेना ने विदेशी पनडुब्बियों के साथ सफलतापूर्वक “मेटिंग” की प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिसे नौसेना की भाषा में पनडुब्बी बचाव के लिए बेहद अहम माना जाता है.
तीन बार सफल मेटिंग
तीन दिन चले इस अभ्यास में भारतीय नौसेना ने तीन बार सफल मेटिंग की, जिसमें रिमोटली ऑपरेटेड वेसल्स (ROVs) के साथ भी अभ्यास किया गया. इससे यह साबित हुआ कि भारत अब वैश्विक स्तर पर पनडुब्बी बचाव अभियानों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
INS निस्तार की अहम भूमिका
इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की नई सबमरीन रेस्क्यू वेसल INS निस्तार ने अहम भूमिका निभाई. यह जहाज डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) के लिए ‘मदरशिप’ की तरह काम करता है और गहराई में फंसी पनडुब्बियों को बचाने में सक्षम है.
पैसिफिक रीच 2025 अभ्यास
पैसिफिक रीच 2025 अभ्यास सिंगापुर की मेजबानी में हुआ और इसमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर समेत कुल 40 देशों ने हिस्सा लिया. भारत, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने अपनी पनडुब्बियां या बचाव जहाज तैनात किए.
अभ्यास चीन सागर के उन contested waters में हुआ
यह अभ्यास दक्षिण चीन सागर के उन contested waters में हुआ जहां चीन के मलयेशिया, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई और ताइवान के साथ समुद्री दावे टकराते हैं. ऐसे संवेदनशील इलाके में भारत की सक्रिय भागीदारी उसकी रणनीतिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाती है.
इसे भी पढ़ें-भारतीय सेना को मिलेगा ‘अनंत शस्त्र’ मिसाइल सिस्टम, पाकिस्तान-चीन सीमा पर एयर डिफेंस होगा और मजबूत
भारतीय नौसेना का यह प्रदर्शन न सिर्फ तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अब समुद्री सुरक्षा और बचाव अभियानों में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है. INS निस्तार की तैनाती और सफल मेटिंग ऑपरेशन भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संकेत है.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



