भारतीय रेलवे ने पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन चलाई
Indian Railways Freight: भारतीय रेलवे ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) पर पहली बार डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन चलाकर माल परिवहन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह ट्रेन 1.3 किलोमीटर लंबी थी और इसमें 360 कंटेनर (TEUs) लादे गए थे.
मुंबई से वडोदरा तक का सफर
21 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे यह ट्रेन मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से रवाना हुई और वडोदरा के वरनामा स्थित CONCOR टर्मिनल तक पहुंची. इस दौरान ट्रेन ने लगभग 422 किलोमीटर की दूरी तय की.
दो रेक को मिलाकर बना लॉन्ग-हॉल
इस ट्रेन में दो डबल-स्टैक कंटेनर रेक शामिल थे जिन्हें जोड़कर एक ही मूवमेंट बनाया गया. हर रेक में 45+1 कंटेनर थे. आगे वाले रेक में 1,817 टन माल था जबकि पीछे वाले रेक में 2,105 टन माल लदा था. दोनों को मिलाकर कुल 3,922 टन माल ट्रांसपोर्ट किया गया.
एक ही मूवमेंट में ज्यादा माल
इस ऑपरेशन से यह साबित हुआ कि लंबी दूरी की एक ट्रेन में ज्यादा कंटेनर ले जाकर कई अलग-अलग मूवमेंट की जरूरत कम की जा सकती है. इससे पोर्ट और इनलैंड टर्मिनल के बीच माल की आवाजाही तेज और आसान हो जाती है.
क्यों है यह ऑपरेशन खास?
डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन से माल ढुलाई की एफिशिएंसी बढ़ती है. एक ही ट्रेन में ज्यादा कंटेनर ले जाने से उतने ही माल के लिए कम ट्रेन मूवमेंट की जरूरत पड़ती है. इससे फ्रेट कॉरिडोर की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होता है और टर्मिनल पर भीड़ कम होती है.
सेवा और योजनाओं से जुड़ाव
रेलवे का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन से कंटेनर जल्दी पोर्ट से बाहर निकलते हैं और ट्रांज़िट टाइम भी घटता है. साथ ही लोकोमोटिव और वैगन की जरूरत भी कम हो जाती है.
माल ढुलाई का नया अध्याय
इस उपलब्धि से साफ है कि वेस्टर्न DFC को ज्यादा कंटेनर वॉल्यूम संभालने के लिए डिजाइन किया गया है. अब यह दिखा रहा है कि लॉन्ग-हॉल और डबल-स्टैक क्षमता को जोड़कर देश में माल की आवाजाही को और तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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