जनता के हवाले होगी रिपोर्ट
Indore Contaminated Water Deaths: जय व्यास/इंदौर: बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की सच्चाई सबके सामने आने का रास्ता साफ हो गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने मामले से जुड़ी 600 पन्नों की न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और जल्द अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस भीषण त्रासदी के लिए कौन-कौन अधिकारी दोषी थे और कैसी अनियमितताएं बरती गई.
क्या था पूरा मामला? (Indore Bhagirathpura Water Case)
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति की गई थी. इसको पीने से करीब 36 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, वहीं 2 हजार से अधिक लोग बीमार पड़े थे और 600 से ज्यादा मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था. अभी भी कई मरीजों में लीवर और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो रही है. घटना के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी भागीरथपुरा पहुंचे थे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी.
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मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था. मामले में सेवानिवृत्त जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था. आयोग ने लंबी जांच-पड़ताल और साक्ष्य जुटाने के बाद करीब 600 पन्नों की अपनी रिपोर्ट कुछ समय पहले सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंपी थी.
रिपोर्ट सार्वजनिक होने से खुलेंगे कई राज (Indore Water Tragedy Report)
एक पक्षकार की आपत्ति के कारण रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने का आग्रह किया गया था. हालांकि, सोमवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं की मांग पर रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दे दिए. दो-तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट के सभी पन्नों को स्कैन कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा. इस रिपोर्ट में न केवल मौतों के कारणों का पर्दाफाश होगा, बल्कि ड्रेनेज लाइन निर्माण में हुए कथित घोटालों और जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर भी से पर्दा उठेगा.
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