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‘रिपोर्ट दो..’, हाईकोर्ट पहुंचा इंदौर का ‘पानी कांड’, 10 मौतों पर सरकार तलब

Indore Water Crisis: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 10 मौतों पर हाई कोर्ट सख्त. नगर निगम को फटकार लगाते हुए पीड़ितों के मुफ्त इलाज का आदेश दिया. 2 जनवरी को सरकार को देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट.

Indore Water Crisis High Court Orders Free Treatment for Bhagirathpura Victims Slams Corporation

Indore Water Crisis: जय व्यास/इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 10 मौतों के मामले में अब न्याय की आस हाई कोर्ट से है. इस गंभीर मसले पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने नगर निगम और जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस त्रासदी के शिकार हुए सभी पीड़ितों का इलाज पूरी तरह से निःशुल्क किया जाए. मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को तय की गई है, जहां सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी.

याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावितों का उचित और मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए. कोर्ट ने शासन-प्रशासन से मृतकों और उपचाराधीन मरीजों की पूरी जानकारी तलब की है. बता दें कि 26 दिसंबर से अब तक दूषित पानी के कारण 10 लोगों की जान जा चुकी है और 100 से ज्यादा लोग बीमार हैं.

2 याचिकाएं की गईं थी दाखिल

भागीरथपुरा में हुए इस जानलेवा ‘पानी कांड’ को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल की गई हैं. पहली याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने और दूसरी कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने दायर की है. इन याचिकाओं में मांग की गई है कि इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हों, पीड़ितों को मुफ्त इलाज मिले और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए.

कांग्रेस को मिला विरोध का मुद्दा

एक तरफ जहां कोर्ट ने सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ 10 मौतों और 150 से ज्यादा लोगों के बीमार होने के बाद इंदौर का सियासी पारा भी चढ़ गया है. कांग्रेस इस मुद्दे पर आक्रामक हो गई है और शहर भर में अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रही है. कहीं मंत्री के लिए ‘सद्बुद्धि’ यज्ञ हो रहा है, तो कहीं नगर निगम को ‘यमराज’ बताया जा रहा है.

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दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है. इंदौर के छावनी चौराहे पर कांग्रेसियों ने प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भगवान से ‘सद्बुद्धि’ देने की प्रार्थना करते हुए घंटे बजाए और प्रदर्शन किया.

एक दूसरे पर मढ़े जा रहे आरोप

इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल सिस्टम पर खड़ा हो रहा है. जनप्रतिनिधि अब नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दोष मढ़ने में लगे हैं. जनता आज यह पूछ रही है कि जब शहर कोई उपलब्धि हासिल करता है, तो श्रेय लेने के लिए जनप्रतिनिधि सबसे आगे कतार में खड़े होते हैं. लेकिन जब ऐसी भयावह दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होनी चाहिए? क्या जनप्रतिनिधि केवल अधिकारों और श्रेय के लिए हैं, कर्तव्यों और जवाबदेही के लिए नहीं?



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