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न्याय मांगने गये परिवादी को पुलिस ने पीटा, आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने में जुटा था तंत्र, कोर्ट ने दिया FIR का आदेश

Chitawa Police Assault Case: परिवादी का आरोप है कि 14 अक्टूबर 2025 को जब वह अपनी शिकायत लेकर चितावा थाने पहुंचा था, तब उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसके कान का पर्दा फट गया. घटना के बाद उसने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर उसे अदालत की शरण लेनी पड़ी.

Chitawa Police Assault Case

Chitawa Police Assault Case

रिपोर्ट- जयप्रकाश शर्मा, डीडवाना, राजस्थान


Chitawa Police Assault Case: चितावा थाने में परिवाद लेकर पहुंचे एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट करने और उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करने के मामले में कुचामन स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय ने बड़ा आदेश जारी किया है. अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने, मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराने तथा डीडवाना-कुचामन पुलिस अधीक्षक को स्वयं इसकी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं. न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों के रवैये पर भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास दिखाई देता है.

न्यायालय में पेश परिवाद के अनुसार प्रार्थी और प्रमोद कंवर के बीच रुपए के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था. इस संबंध में प्रार्थी के खिलाफ दर्ज प्रकरण संख्या 166/2025 को पुलिस जांच में पहले ही झूठा माना जा चुका था. आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस थाना कुचामन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रार्थी के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा धारा 126 और 170 बीएनएसएस के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया.

परिवादी का यह भी आरोप है कि 14 अक्टूबर 2025 को जब वह अपनी शिकायत लेकर चितावा थाने पहुंचा था, तब उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसके कान का पर्दा फट गया. घटना के बाद उसने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर उसे अदालत की शरण लेनी पड़ी.

Chitawa Police Assault Case

कोर्ट ने जांच रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्टों और कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की. न्यायालय ने पाया कि वृत्ताधिकारी कुचामन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में किसी भी स्वतंत्र गवाह के बयान शामिल नहीं थे. अदालत ने टिप्पणी की कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों के तैयार की गई रिपोर्ट अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को बचाने के उद्देश्य से पेश की गई प्रतीत होती है.

कोर्ट ने यह भी पाया कि घटना के समय के थाने के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणित और बिना छेड़छाड़ की गई रिकॉर्डिंग प्रस्तुत नहीं की गई.

एसपी की रिपोर्ट नहीं आने पर भी नाराजगी

न्यायालय ने आदेश में उल्लेख किया कि जिला पुलिस अधीक्षक से कई बार तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन उनकी ओर से भी कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई. अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और प्रभावी कार्रवाई से बचने का प्रयास दिखाई देता है.

स्वतंत्र अधिकारी करेगा जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीजेएम न्यायालय ने कुचामन थाना पुलिस को परिवादी की शिकायत के आधार पर सुसंगत धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. साथ ही स्थानीय पुलिस अधिकारियों की भूमिका विवादित होने के कारण जांच कुचामन वृत्त से बाहर के किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अधिकारी को सौंपने के निर्देश जारी किए हैं.

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अदालत ने डीडवाना-कुचामन पुलिस अधीक्षक को पूरे अनुसंधान की व्यक्तिगत निगरानी करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है. मामले की प्रगति एवं अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 10 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है.

-भारत एक्सप्रेस



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