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ITBP Raising Day: अमित शाह ने हिमवीरों को दी बधाई, बर्फीली चोटियों पर जवानों के शौर्य को किया सलाम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ITBP के 64वें स्थापना दिवस पर हिमवीरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके अदम्य साहस और समर्पण की सराहना की.

ITBP Raising Day: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 64वें स्थापना दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के हिमवीरों को शुभकामनाएं दीं और उनके अदम्य साहस की सराहना की. उन्होंने कहा कि बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ों पर इन जवानों के शौर्य की गूंज हर खतरे को चुनौती देती है. कठिन से कठिन मौसम में भी डटे रहने वाले आईटीबीपी के जवान देश की सुरक्षा के प्रति भारत के मजबूत इरादों का प्रतीक हैं.

अमित शाह ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश के जरिए आईटीबीपी के जवानों को बधाई दी. उनका यह संदेश उन सैनिकों के सम्मान में था, जो देश की सीमाओं की रक्षा के लिए दुर्गम पहाड़ी इलाकों में दिन-रात मुस्तैद रहते हैं. हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर बेहद कठिन रास्तों तक, इन जवानों की जिम्मेदारी केवल सीमा पर निगरानी रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर चुनौती का सामना करते हुए देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है.

1962 के युद्ध के बाद हुई थी ITBP की स्थापना

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी. इस बल को खास तौर पर हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया. आज आईटीबीपी के जवान भारत-चीन सीमा के करीब 3,488 किलोमीटर लंबे हिस्से की निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं.

 

यह सीमा ऐसे इलाकों से होकर गुजरती है, जहां ऊंचाई बहुत ज्यादा है और मौसम पल-पल बदलता रहता है. कई जगहों पर तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है. बर्फीली हवाओं, भारी बर्फबारी और ऑक्सीजन की कमी के बीच ड्यूटी करना आसान नहीं होता. इसके बावजूद हिमवीर पूरी मुस्तैदी के साथ अपने कर्तव्य का पालन करते हैं.

बर्फीली चोटियों पर भी कम नहीं होता जवानों का हौसला

आईटीबीपी के जवानों को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. ऊंचे पहाड़ों पर गश्त लगाना, बर्फ से ढके रास्तों पर आगे बढ़ना और मुश्किल हालात में अपनी सुरक्षा के साथ सीमा की निगरानी करना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा है.

इन जवानों की ट्रेनिंग में स्कीइंग और बर्फीले इलाकों में हथियारों के साथ अभ्यास जैसी गतिविधियां भी शामिल होती हैं. ऐसी तैयारी उन्हें किसी भी आपात स्थिति से निपटने में मदद करती है. स्थापना दिवस के अवसर पर सामने आई तस्वीरों में भी जवानों का यही जज्बा नजर आता है. कहीं वे बर्फ से ढकी पहाड़ी पर तिरंगे के साथ खड़े दिखाई देते हैं, तो कहीं जमे हुए इलाकों में गश्त करते और स्की के जरिए सैन्य अभ्यास करते नजर आते हैं. परेड की तस्वीरें भी बल के अनुशासन और तैयारी को दर्शाती हैं.

शहीद जवानों के बलिदान को भी किया याद

आईटीबीपी के स्थापना दिवस का अवसर उन जवानों को याद करने का भी है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. सीमा पर तैनात सैनिकों की ड्यूटी कई बार ऐसी परिस्थितियों में होती है, जहां छोटी-सी चूक भी गंभीर चुनौती बन सकती है. ऐसे में उनका साहस, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

अमित शाह का संदेश इसी जज्बे और समर्पण को सम्मान देने वाला है. हिमवीरों की बहादुरी देशवासियों को यह भरोसा दिलाती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए जवान पूरी मजबूती से खड़े हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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