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खत्म होने लगे अनशन! 23 दिन बाद 3 छात्रों ने तोड़ी भूख हड़ताल, क्या पीछे हटेंगे सोनम वांगचुक?

जंतर-मंतर पर 23 दिनों से अनशन पर बैठे तीन छात्र कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी. अब चर्चा सोनम वांगचुक के रुख पर है, जिन्होंने अनशन खत्म करने के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं.

Jantar Mantar Drama: संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सियासी और सामाजिक ड्रामे का हाई-वोल्टेज नजारा देखने को मिला. एक तरफ जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता ‘संसद चलो’ का नारा देकर सरोकारों की आड़ में सड़कों पर हंगामा और नारेबाजी कर रहे थे.

वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर ही पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों का सब्र आखिरकार जवाब (Jantar Mantar Hunger Strike end) दे गया. कई बड़े नेताओं, सामाजिक हस्तियों के मान-मनौव्वल और कड़क हस्तक्षेप के बाद अनशन पर बैठे तीन प्रमुख छात्र कार्यकर्ताओं ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है.

इसके बाद अब पूरी दिल्ली की नजरें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर टिक गई हैं, जिन्होंने अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने अपनी शर्तों का नया पुलिंदा खोल दिया है.

AISA के 3 कार्यकर्ताओं का अनशन खत्म(Jantar Mantar Hunger Strike end)

दरअसल जंतर-मंतर पर 28 जून से डटे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े नेहा, मनीष और आमीन नाम के तीन प्रमुख कार्यकर्ताओं ने सोमवार को 23 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन आखिरकार समाप्त कर दिया. लगातार भूखे रहने के कारण तीनों कार्यकर्ताओं के शरीर का वजन 12 प्रतिशत से भी ज्यादा घट गया था और उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका था.

गंभीर मेडिकल जटिलताओं के बावजूद प्रदर्शन का झंडा बुलंद करने वाले इन छात्रों ने नेताओं के बार-बार अनुरोध के बाद अनशन वापस लिया. अनशन खत्म करते ही छात्र संगठन ने ऐलान किया है कि अब वे भूख हड़ताल के बजाय संसद सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, एनटीए (NTA) और नीट पेपर लीक के खिलाफ पूरे देश में एक महीने का कड़क अभियान चलाएंगे.

CJP के प्रोटेस्ट में भड़के प्रदर्शनकारी(Sonam Wangchuk Hunger Strike)

एक तरफ जहां AISA के छात्र अनशन तोड़ (Jantar Mantar Hunger Strike end) रहे थे, वहीं जंतर-मंतर पर मौजूद CJP के प्रदर्शनकारी संसद की तरफ बढ़ने की नाकाम कोशिशों में पुलिस से उलझते नजर आए. इस पूरे गहमागहमी वाले माहौल के बीच सफदरजंग अस्पताल से सोनम वांगचुक ने भी अपना अनशन खत्म करने के लिए तीन कड़क शर्तें सामने रख दी हैं. वांगचुक ने सोशल मीडिया पर साफ लिखा कि अगर केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया विफलताओं और पेपर लीक जैसे घोटालों की जिम्मेदारी 20 जुलाई तक खुले तौर पर स्वीकार कर लेती है, तो वह तुरंत अपना अनशन वापस ले लेंगे.

इसके अलावा, उन्होंने शर्त रखी है कि यदि CJP का नेतृत्व और वे स्वयं संसद के मुख्य द्वार तक पहुंचते हैं और वहां विभिन्न दलों के सांसद उन्हें इस मुद्दे को संसद में उठाने का ठोस आश्वासन देते हैं, तब भी वे भूख हड़ताल खत्म कर देंगे.

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जंतर-मंतर से संसद तक गर्माती सियासत

सोनम वांगचुक के इस अल्टीमेटम और CJP के संसद घेराव वाले ड्रामे पर फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. केंद्र सरकार का रुख साफ नजर आ रहा है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. जहां एक तरफ CJP के प्रदर्शनकारी बिना अनुमति संसद कूच करने की फिराक में पुलिसिया नाकाबंदी और मेट्रो स्टेशनों के बंद होने से हलकान हैं.

वहीं अनशन खत्म करने वाले छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन थमा नहीं है. अनशन खत्म होने की इस खबर ने जंतर-मंतर के माहौल को जरूर थोड़ा बदला है, लेकिन संसद के भीतर और बाहर शिक्षा व्यवस्था के नाम पर शुरू हुई यह जंग आने वाले दिनों में और तीखी होने वाली है.

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-भारत एक्सप्रेस



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