झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार को बड़ा झटका फोटो- @Bharat Express
JPSC JSSC Exam Cancellation Case: झारखंड में हुए छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने JPSC और JSSC की 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया था. इससे इन परिक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी. अब उनके पक्ष में कोर्ट ने अपना फैसला दिया है. दबाव में आकर हेमंत सोरेन सरकार ने जिन 22 भर्ती परीक्षाओं को रातों-रात रद्द करने का फरमान सुनाया था, उस पर झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. अदालत के इस कड़े फैसले से उन हजारों नवनियुक्त अफसरों और अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे थे.
सरकार का ‘एकतरफा’ फैसला (JPSC Exam Cancellation Latest Update)
दरअसल, जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित धांधली के आरोपों को लेकर रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में 24 दिनों से छात्र उग्र प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दबाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 18 अगस्त को एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की CID जांच के आदेश भी दिए गए थे. लेकिन सरकार के इस फैसले से वे अभ्यर्थी भड़क गए, जिन्होंने परीक्षा पास कर ली थी और सरकारी सेवा में पहुंच गए हैं.
याचिकाकर्ताओं का क्या तर्क है? (Jharkhand High Court On JPSC Exam Cancellation)
सरकार के इस आदेश के खिलाफ सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी समेत कई ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनके अधिवक्ताओं (इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स) ने अदालत में मजबूती से दलील दी कि अभ्यर्थियों का पक्ष सुने बिना परीक्षाओं को रद्द करना पूरी तरह से अनुचित है. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यदि जांच में किसी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो केवल उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी को बिना जांच के नौकरी से बाहर निकाल देना अन्याय है.
अदालत का फैसला से क्या होगी आगे की राह? (JPSC JSSC Recruitment Controversy)
न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इन दलीलों को सही मानते हुए हेमंत सरकार के उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी. अदालत ने इन कर्मचारियों को वापस अपनी ड्यूटी पर लौटने को भी कहा है. फिलहाल, हाई कोर्ट का यह फैसला उन युवाओं के लिए एक बड़ी जीत है, जिन्हें नौकरी छिनने का डर सता रहा था. अब इस मामले की अगली सुनवाई में तय होगा कि सरकार की जांच कमेटी और सीबीआई (CBI) जांच की मांग के बीच इन लाखों युवाओं के भविष्य का क्या होगा.
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