मधुकर आनंद/रांची: झारखंड में JMM ने दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करके लगातार दो बार सरकार बनाने के बाद अब JMM झारखंड के बाहर भी अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है. इस साल असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि JMM भी इन चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की असम यात्रा और उनके कुछ बयान निश्चित रूप से इसी ओर इशारा करते हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को रांची जाने से पहले दुमका एयरपोर्ट पर मीडिया से बात की और इस बातचीत की . इस दौरान उन्होंने असम और बंगाल चुनावों में JMM की भागीदारी का संकेत भी दिया. इसके बाद से इस मामले पर राजनीतिक चर्चा शुरू हुई.
मीडिया के सवालों का दिया जवाब
बातचीत के दौरान मीडियाकर्मियों ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या झारखंड की सत्ताधारी पार्टी JMM असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ेगी. इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह आने वाले दिनों में पार्टी स्तर पर तय किया जाएगा लेकिन एक बात तय है JMM ने हमेशा आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है और आगे भी लड़ती रहेगी.
जहां आदिवासी वहां JMM
हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि गुरुजी (शिबू सोरेन) का ग्रेटर झारखंड का सपना पूरा होगा. गुरुजी हमेशा देश के उन क्षेत्रों के आदिवासियों से जुड़े रहे हैं जहां उनकी अच्छी खासी आबादी है. उन्होंने आगे कहा कि देश के इन हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदाय भी JMM परिवार को जानते हैं.
असम की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि असम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं. वहां की चाय इंडस्ट्री काफी हद तक आदिवासी समुदाय पर निर्भर है. 100-150 सालों से आदिवासी काम के लिए अलग-अलग राज्यों में बसे हुए हैं लेकिन वे पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. जहां भी आदिवासी समुदाय रहते हैं, उन्हें JMM पर भरोसा है. अगर हम उनकी आवाज़ को बुलंद करने का माध्यम बन सकते हैं, तो इसमें कोई किसी भी तरह के सवाल की गुंजाइश नहीं है.
बिहार चुनाव में बेपर्दा हो चुका है JMM
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के बाहर अपनी पार्टी के लिए एक मजबूत उपस्थिति बनाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन ये भी सच है कि पार्टी हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में लड़ने के लिए एक भी सीट हासिल करने में नाकाम रही. इतना ही नहीं पहले बयान देने के बावजूद उन्होंने अकेले दम पर एक भी सीट पर चुनाव लड़ने की हिम्मत भी नहीं दिखाई. नतीजा वे बिहार में चुनाव नहीं लड़ पाए. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि JMM असम और पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में कितनी हिम्मत दिखा पाता है.
असम में चाय आदिवासी तो बंगाल में वृहत झारखंड
झारखंड मुक्ति मोर्चा असम में चाय बागान के आदिवासी मजदूर के भरोसे चुनाव लड़ने की सोच रखता है. दशकों पहले झारखंड से लाखों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग असम के चाय बागानों में काम करने चले गए. आज उनकी आबादी चुनाव को प्रभावित करने की हालत में है. ऐसे ही आदिवासियों के एक बड़े कार्यक्रम में शिरकत कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड लौटे हैं.
हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा को लेकर आदिवासियों में जो उत्साह दिखा उसके बाद मुख्यमंत्री भी वहां चुनाव लड़ने के लिए उत्साहित हुए हैं. बंगाल की बात करें तो शिबू सोरेन शुरुआती दौर से ही वृहद झारखंड की मांग करते रहे हैं जिसमें पश्चिम बंगाल के भी झारखंड के सीमावर्ती जिले शामिल थे . हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा को लगता है कि उस मांग के भरोसे झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटी सीटों पर भाग्य आजमाया जा सकता है.
हिमंता के खिलाफ बड़ा राजनीतिक कारण
6 महीने पहले झारखंड में जब विधानसभा के चुनाव हुए तो बीजेपी की तरफ से मुख्य नेतृत्व कर्ता असम के मुख्यमंत्री हिमानता विश्व शर्मा थे. विधानसभा के चुनाव में बीजेपी की रणनीति पूरी तरह से उन्हीं के हाथों थी. हेमंत ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और आदिवासियों के ऊपर मुसलमानों के सांस्कृतिक हमले को लेकर बहुत माहौल बनाया था. तब असम के मुख्यमंत्री के निर्देश पर भाजपा के सभी बड़े नेता संथाल परगना में आदिवासी लड़कियों से घुसपैठी मुसलमान की शादी के मुद्दे को जोर-जोर से उठाते थे. जिसका नतीजा हुआ के आदिवासी हेमंत सोरेन के पक्ष में गोल बंद हो गए और बीजेपी की बुरी हार के पीछे का महत्वपूर्ण कारण भी यही रहा.
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विधानसभा चुनाव के वक्त हालात ऐसे थे कि एक ही दिन में हिमानता विश्व शर्मा असम का भी काम संभालते थे और झारखंड का चुनाव भी. कुल मिलाकर हिमानता ने हेमंत को विधानसभा के चुनाव के दौरान काफी परेशान किया था. अब संभवतः हेमंत सोरेन चाहते हैं कि असम के चुनाव में आदिवासियों की बड़ी आबादी का राजनीतिक तीर उलट कर हिमंता के ऊपर चलाएं.
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