Justice Yashwant Varma Case
Justice Yashwant Varma Case: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से मिले अधजले नोटों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट आज, बुधवार को मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश की जाएगी. रिपोर्ट सामने आने के बाद यह साफ हो सकता है कि जस्टिस वर्मा पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है.
यह मामला पिछले साल मार्च में सामने आया था. जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने के बाद वहां बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी. खास बात यह थी कि नकदी का एक हिस्सा जला हुआ था. मामला सामने आते ही न्यायपालिका से लेकर संसद तक हलचल तेज हो गई. बाद में जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया.
सांसदों ने की थी हटाने की मांग
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब 200 से ज्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को याचिका सौंपी. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई. इसी समिति ने पूरे मामले की जांच की है और अब उसकी रिपोर्ट संसद के सामने रखी जा रही है.
रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. हालांकि, इस मामले में एक संवैधानिक सवाल भी खड़ा हो गया है. जस्टिस वर्मा ने इसी साल 9 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. ऐसे में यह बहस जारी है कि इस्तीफा देने की स्थिति में भी क्या संसद उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है.
कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम (ऑनर्स) और रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की. 8 अगस्त 1992 को उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत शुरू की.
अक्टूबर 2014 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया और फरवरी 2016 में वह स्थायी जज बने. अक्टूबर 2021 में उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट कर दिया गया.
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15 मार्च 2025 का है मामला
जस्टिस वर्मा से जुड़ा विवाद 15 मार्च को उस समय सामने आया, जब उनके दिल्ली स्थित आवास से बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने की खबर आई. इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया. अब जांच समिति की रिपोर्ट लोकसभा में पेश होने के बाद इस पूरे प्रकरण में आगे की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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