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कानपुर में ये क्या हुआ? अचानक ITBP कमांडो ने पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर डाला डेरा; सहम गए पुलिसवाले

ITBP के हथियारबंद कमांडो द्वारा कानपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचने की घटना ने पूरे यूपी प्रशासन में सनसनी फैला दी. बताया जा रहा है कि एक आईटीबीपी जवान की मां के इलाज में कथित लापरवाही और पुलिस कार्रवाई न होने से जवानों में भारी नाराजगी थी…

Kanpur ITBP police commissioner office controversy: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से भारतीय पुलिस और सुरक्षा बलों के इतिहास का सबसे हैरान और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दरअसल कानपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में उस वक्त एक बेहद तनावपूर्ण और अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के दर्जनों भारी हथियारबंद कमांडो ने अचानक पुलिस कमिश्नर (CP) ऑफिस को चारों तरफ से घेर लिया. आधुनिक ऑटोमैटिक हथियारों और सैन्य वाहनों के साथ पहुंचे इन कमांडो ने पूरे कमिश्नरेट परिसर में अपना डेरा डाल दिया.

चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक हुए इस सैन्य घेराव (Kanpur police V/S ITBP) को देखकर ड्यूटी पर तैनात स्थानीय पुलिसकर्मियों की घिग्घी बंध गई और वे डर के मारे पीछे हट गए. इतिहास में पहली बार सुरक्षा बल के जवानों द्वारा इस तरह सीधे पुलिस के सबसे बड़े दफ्तर का घेराव करने से न केवल कानपुर पुलिस बल्कि पूरे यूपी शासन में हड़कंप मच गया है.

आखिर क्यों फूटा देश के रक्षकों का गुस्सा?(Kanpur police V/S ITBP)

इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल विवाद की जड़ें किसी बड़े अपराध से नहीं, बल्कि देश की सीमा पर तैनात एक आईटीबीपी कमांडो की मां के साथ हुए दर्दनाक हादसे से जुड़ी हैं. दरअसल कुछ समय पहले उक्त कमांडो की मां का एक हादसे में हाथ कट गया था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था.

आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की तरफ से बेहद गंभीर और अमानवीय लापरवाही बरती गई, जिससे बुजुर्ग महिला की स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई. इस पूरी घटना और बेबस मां के कटे हाथ का एक बेहद भावुक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसने इंटरनेट पर लोगों का दिल दहला दिया था और इसके बाद ही साथी जवान की मां को इंसाफ दिलाने के लिए आईटीबीपी के जवानों में अंदर ही अंदर भारी आक्रोश पनप रहा था.

‘वर्दी’ ने खुद संभाल लिया मोर्चा

बता दें कि हादसे और इलाज में हुई घोर लापरवाही के बाद पीड़ित कमांडो के परिवार ने न्याय की उम्मीद में कानपुर पुलिस से संपर्क साधा था और संबंधित दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन आरोप है कि उत्तर प्रदेश की स्थानीय पुलिस ने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले इस जवान की फरियाद को पूरी तरह अनसुना कर दिया और मामले में कोई ठोस मदद या कार्रवाई नहीं की.

वहीं जब सिस्टम से हर तरफ निराशा हाथ लगी और कानून के रखवालों से ही मदद का रास्ता बंद हो गया, तो नाराजगी और गुस्से से भरे आईटीबीपी के जवानों ने खुद मोर्चा (Kanpur police V/S ITBP) संभालने का फैसला किया.

कूटनीतिक स्तर पर सुलझाने की कोशिशें तेज

कानपुर के इस अभूतपूर्व घटनाक्रम (Kanpur police V/S ITBP) ने देश की आंतरिक सुरक्षा और दो बड़े सुरक्षा बलों के बीच के आपसी तालमेल पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. बताते चलें गृह मंत्रालय और उत्तर प्रदेश महानिदेशक (DGP) कार्यालय भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं और सैन्य अधिकारियों के साथ संपर्क साधकर स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिशें की जा रही हैं.

हालांकि, माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल कानपुर पुलिस और आईटीबीपी दोनों ही पक्षों की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. पूरा देश इस समय यह जानने के लिए उत्सुक है कि आखिर व्यवस्था की किस बड़ी नाकामी ने सरहद के जवानों को अपने ही देश की पुलिस के खिलाफ इस कदर हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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