कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व के लिए एक भारी चुनौती सामने खड़ी हो गई है. कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज हो चुका है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच कुर्सी की लड़ाई खुलकर सामने आ रही है. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार अपने 5 साल के कार्यकाल में से आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी है, जिसके बाद से सीएम पद को लेकर तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है.
‘DK शिवकुमार हमें स्वीकार है’
20 नवंबर को सिद्धारमैया सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में से ढाई साल पूरे किए हैं. इसके बाद से यह चर्चा शुरू है कि अब डिप्टी सीएम, मख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं. इसे लेकर सिद्धारमैया गुट से कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा है कि वह खुद भी साएम बना चाहते हैं.
उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कहा, ‘जब कोई मुझसे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा के बारे में पूछता है, तो मैं बता देता हूं कि मैं भी सीएम की रेस में हूं. लेकिन अगर सत्ता में बदलाव होता है और डीके मुख्यमंत्री बनते हैं, तो हम उसे स्वीकार करेंगे.
DK शिवकुमार ने याद दिलाया वादा
डीके शिवकुमार ने पहली बार खुलकर बताया कि 2023 में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी. अब शिवकुमार ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर कर सिद्धारमैया और कांग्रेस नेतृत्व को उस वायेद की याद दिलाया है. उन्होंने लिखा, ‘शब्द शक्ति ही विश्व शक्ति है.’ इस पोस्ट को लेकर हलचल और तेज हो गई है.
ಕೊಟ್ಟ ಮಾತು ಉಳಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದೇ ವಿಶ್ವದಲ್ಲಿರುವ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿ! pic.twitter.com/klregNRUtv
— DK Shivakumar (@DKShivakumar) November 27, 2025
1 दिसंबर को फैसला
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान 1 दिसंबर से पहले कर्नाटक सरकार पर बड़ा फैसला ले सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जल्द ही सीएम सिद्धारमैया और डीप्टी सीएम शिवकुमार से अलग-अलग मुलाकात कर बातचीत कर सकते है. हालांकि कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. 1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी चाहती है कि इससे पहले कर्नाटक की स्थिति को स्पष्ट किया जाए.
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यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस हाईकमान को ऐसी स्थिति संभालनी पड़ रही है. साल 2018 में भी राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच यही संघर्ष हुआ था, जिसे हाईकमान ने शांतिपूर्ण तरीके से हल कर सरकार को 5 साल तक चलाया था.
-भारत एक्सप्रेस
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