'सत्ता-साझेदारी और समझौते'
Karnataka Political Crisis: काफी समय में स्थिर दिख रही कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार अब डगमगाती हुई नजर आ रही है. बेगलूरू से दिल्ली चल चर्चाओं का बाजार गर्म है. इस बीच DK शिवकुमार के समर्थक विधायकों की संख्या में इजाफा हुआ है. कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रहा मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ता संघर्ष अब दिल्ली तक पहुंच गया है. इससे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है.
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों का एक और समूह पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा है. वहीं बेगलूरू में मौजूद पार्टी अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने के लिए खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहुंचे थे.
DK शिवकुमार के समर्थकों का दिल्ली कूच
जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का समर्थन करने वाले विधायकों का एक और समूह पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचा है. इसमें एच सी बालकृष्ण, के एम उदय, नयना मोटाम्मा, इकबाल, शरथ बाचेगौड और शिवगंगा बसवराज शामिल हैं. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर जल्द ही कुछ और विधायकों के दिल्ली आने की संभावना है.
ढाई साल के सत्ता-साझेदारी (Karnataka Govt Formula)
यह सारा मामला 2023 के ढाई साल के सत्ता-साझेदारी समझौते पर आधारित है, जिसके तहत सिद्धारमैया का कार्यकाल कथित तौर पर 20 नवंबर को पूरा हो चुका है, और अब शिवकुमार को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए. राज्य में कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने ढाई साल पूरे कर लिए.
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सियासी बाजार हुआ गर्म (Karnataka Political Crisis)
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे फिल्हाल बेंगलुरु में हैं और जल्द ही दिल्ली जाने वाले हैं. वहीं राहुल गांधी विदेश यात्रा से लौटने वाले हैं. शिवकुमार का समर्थन करने वाले लगभग दस विधायकों ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली जाकर खरगे से मुलाकात की थी. अब एक बार फिर से कुछ विधायकों के दिल्ली पहुंचने की खबर ने सियासी बाजार को गर्म कर दिया है.
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