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‘जहां हो, हर कदम पर नजर…’, कश्मीरी पंडितों की वापसी से तिलमिलाए आतंकी, रच दी ये बड़ी साजिश

कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी के बीच आतंकी संगठनों के नाम से कथित धमकी पत्र सामने आया है. पत्र में जम्मू में रह रहे कुछ कश्मीरी हिंदुओं की पहचान उजागर करने का दावा किया गया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं.

Kashmiri Hindus Terror Threat

कश्मीरी हिंदुओं की वापसी के बीच कथित आतंकी धमकी पत्र से हड़कंप

Kashmiri Hindus Terror Threat: कश्मीर घाटी में तेजी से लौटती शांति, सुधरते सुरक्षा हालात और मोदी सरकार के पुनर्वास प्रयासों के तहत विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की अपनी मातृभूमि में वापसी से सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं और उनके स्थानीय गुर्गों की नींद उड़ गई है. घाटी में अपना जनाधार और खौफ पूरी तरह खो चुके आतंकी संगठनों ने एक बार फिर कायरतापूर्ण धमकी की भाषा का सहारा लिया है. बता दें कि इस बार निशाना केवल घाटी में तैनात कश्मीरी हिंदू कर्मचारी ही नहीं बल्कि जम्मू के विभिन्न सुरक्षित इलाकों में बसे विस्थापित कश्मीरी हिंदू भी हैं.

जानकारी के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठनों द्वारा जारी एक कथित धमकी पत्र ने सुरक्षा तंत्र को अलर्ट मोड पर ला दिया है, जिसमें जम्मू में रह रहे आधा दर्जन कश्मीरी हिंदुओं के नाम और घर के पते लीक करने का नापाक दावा किया गया है.

‘गद्दार’ बताकर खौफ फैलाने की कोशिश(Kashmiri Hindus Terror Threat)

प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठनों-‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) और ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (ULC) के नाम से सामने आए इस कथित खत में कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ बेहद जहरीली भाषा का इस्तेमाल किया गया है. कथित तौर पर अहमद बिलाल नामक आतंकी के दस्तखत वाले इस पत्र में कश्मीरी हिंदुओं को ‘व्हाइट कॉलर आतंकवादी’ और ‘गद्दार’ बताते हुए उन पर दिल्ली के आकाओं के लिए काम करने का अनर्गल आरोप लगाया गया है.

बता दें पत्र में खुलेआम धमकी दी गई है कि “तुम जहां भी हो, तुम्हारे हर कदम पर हमारी नजर है. आतंकवादियों की इस गीदड़ भभकी का सीधा मकसद घाटी में रोजगार और सरकारी योजनाओं के तहत लौट रहे कश्मीरी पंडितों के मन में दोबारा 1990 जैसा डर पैदा करना और समाज में वैमनस्य फैलाना है.

आतंकियों की नाक में क्यों हुआ दर्द?

दरअसल, आतंकवादियों और उनके हमदर्दों की इस छटपटाहट के पीछे केंद्र सरकार का वह ऐतिहासिक पुनर्वास अभियान है, जो कश्मीरी हिंदुओं को उनकी जड़ों से दोबारा जोड़ रहा है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कश्मीरी प्रवासियों के लिए स्वीकृत 6,000 सरकारी पदों में से 98 प्रतिशत से अधिक (5,896 पद) पर नियुक्तियां दी जा चुकी हैं.

इसके अलावा घाटी में प्रवासी कर्मचारियों के सुरक्षित ठहराव के लिए 20 अलग-अलग स्थानों पर 6,000 ट्रांजिट आवास बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 4,112 फ्लैट बनकर तैयार हो चुके हैं. जब आतंकी देख रहे हैं कि उनका दशकों पुराना खौफनाक एजेंडा और जनसांख्यिकी बदलने की साजिश नाकाम हो रही है, तो वे ऐसी गुमनाम चिट्ठियों के जरिए सनसनी फैलाने का गंदा खेल खेल रहे हैं.

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भाजपा बोली-‘वापसी रुकने वाली नहीं’

इस सनसनीखेज चिट्ठी (Kashmiri Hindus Terror Threat) के सामने आते ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और जम्मू-कश्मीर पुलिस मुस्तैद हो गई हैं. एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पत्र में दर्ज नाम और मकान नंबर असली हैं या केवल दहशत पैदा करने के लिए कोई मनगढ़ंत सूची बनाई गई है. यदि डेटा असली है, तो यह जानकारी किस प्रशासनिक या स्थानीय नेटवर्क से लीक हुई, इसकी भी गहन जांच की जा रही है.

उधर, जम्मू-कश्मीर भाजपा के संगठन महासचिव अशोक कौल ने स्पष्ट कहा है कि कश्मीरी हिंदुओं की अपनी मातृभूमि पर वापसी एक अटूट सत्य है. उन्होंने जोर दिया कि छिटपुट धमकियों और लक्षित हत्याओं के खतरों के बावजूद सामाजिक सौहार्द और सुरक्षा बलों की चौकसी के बल पर कश्मीरी पंडितों का सुरक्षित पुनर्वास होकर रहेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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