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नोरा फ़तेही और संजय दत्त का गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’, अश्लीलता का मामला गरमाया; सख्त कार्रवाई की मांग

सोशल एक्टिविस्ट डॉ. शालिनी अली ने सीबीएफसी और एनसीडब्ल्यू में ‘अश्लील’ गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, मांगा तत्काल प्रतिबंध और कानूनी कार्रवाई.

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर छिड़ा विवाद अब और तूल पकड़ गया है. जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शालिनी अली ने इस गाने के खिलाफ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) में अलग-अलग तत्काल शिकायतें दर्ज कराई हैं. डॉ. अली ने इस गाने पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि यह ट्रैक अश्लीलता को बढ़ावा देता है और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है.

‘नैतिक मानकों में गिरावट का प्रतीक’

अभिनेत्री नोरा फतेही और अभिनेता संजय दत्त पर फिल्माया गया यह गाना अपनी रिलीज के बाद से ही आलोचनाओं के घेरे में है. इसके भड़काऊ बोल और अश्लील दृश्यों को लेकर लगातार नाराजगी जताई जा रही है. सीबीएफसी के अध्यक्ष प्रसून जोशी को भेजी अपनी विस्तृत शिकायत में डॉ. अली ने इस गाने को ‘अश्लील और आपत्तिजनक’ बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने तर्क दिया कि गाने के हिंदी और मूल कन्नड़ दोनों संस्करणों में इस्तेमाल की गई भाषा “शालीनता की सभी स्वीकार्य सीमाओं का उल्लंघन करती है और यह हमारे नैतिक एवं सांस्कृतिक मानकों में गंभीर गिरावट को दर्शाती है.”

एनसीडब्ल्यू में भी शिकायत

इसके साथ ही, डॉ. अली ने राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर से भी संपर्क किया है. उन्होंने महिला अधिकारों की यह संस्था से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया है. अपनी शिकायत में उन्होंने युवा मस्तिष्क पर ऐसी सामग्री के “हानिकारक प्रभाव” को रेखांकित करते हुए कहा कि यह “महिलाओं को केवल भोग्या वस्तु समझने की मानसिकता को सामान्य बनाता है और हमारे देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए अपमानजनक एवं खतरनाक सोच को बढ़ावा देता है.”

सरकार और एनएचआरसी का सख्त रुख

डॉ. अली की यह सख्त अपील ऐसे समय में आई है जब इस गाने के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पहले ही इस मामले में नोटिस जारी कर दिया था, जिसके बाद आधिकारिक वीडियो को यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया. बताया जा रहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सीबीएफसी को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, और यदि अश्लीलता के आरोप सही पाए जाते हैं तो गाने को सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाना सुनिश्चित करने को कहा है.

कौन हैं डॉ. शालिनी अली?

एक प्रमुख समाजसेवी और सुधार की मुखर आवाज के रूप में पहचानी जाने वाली डॉ. शालिनी अली विवादास्पद सामाजिक मुद्दों पर रुख अपनाने के लिए जानी जाती हैं.

नई दिल्ली के निजामुद्दीन वेस्ट की रहने वाली डॉ. अली लगातार पारदर्शिता, जवाबदेही और महिला सशक्तिकरण की पैरोकार रही हैं. फिल्म उद्योग से जुड़ी बहस में उनका यह नवीनतम हस्तक्षेप, समाज के ‘नैतिक परिवेश’ की रक्षा के प्रति उनकी व्यापक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है. एनसीडब्ल्यू में दी गई अपनी शिकायत में उन्होंने न केवल गाने पर प्रतिबंध लगाने, बल्कि इसमें शामिल सभी पक्षों – अभिनेताओं, गीतकार और निर्माताओं – के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है.

बंटी हुई राय

जहां इस गाने पर की गई कार्रवाई को कई वर्गों का समर्थन मिला है, वहीं इसने सेंसरशिप पर भी बहस छेड़ दी है. फिल्मकार ओनिर ने सीबीएफसी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उसकी प्राथमिकताओं पर चोट की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “और सेंसर बोर्ड फिल्मों के नामकरण में व्यस्त है… कितना अजीब देश बनते जा रहे हैं हम… वैलेंटाइन डे सेलिब्रेशन, अंतरधार्मिक विवाह/समारोह का विरोध, लेकिन इस बकवास को ओके.”

वहीं, अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस प्रतिबंध का समर्थन करते हुए फिल्म इंडस्ट्री को ‘अश्लीलता की सारी हदें पार करने’ के लिए जिम्मेदार ठहराया.

कानूनी पक्ष और आगे की राह

एडवोकेट विनीत जिंदल, जिन्होंने भी इस मामले में अलग से शिकायत दर्ज कराई है, ने कहा है कि गाने का प्रसारण भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 294 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडात्मक प्रावधानों के दायरे में आ सकता है. दिल्ली पुलिस साइबर सेल में एक अलग आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

इस बीच, गीतकार रकीब आलम ने विवादित पंक्तियों को लिखने से इनकार किया है. उनका दावा है कि उन्हें फिल्म के निर्देशक प्रेम द्वारा लिखे गए कन्नड़ संस्करण का शाब्दिक अनुवाद करने के लिए कहा गया था. कलात्मक स्वतंत्रता बनाम सार्वजनिक शिष्टाचार की यह बहस जारी है, और डॉ. शालिनी अली के इस कड़े रुख ने जवाबदेही की मांग को और मजबूत कर दिया है, जिससे यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.

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-भारत एक्सप्रेस



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