देश अभी नेपाल में हुए हिंसक प्रदर्शन को भूल भी नहीं पाया था कि लद्दाख में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन पहले तो शांतिपूर्ण था लेकिन बुधवार को अचानक इतना उग्र हो गया कि चार लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए.
कब से शुरू हुआ था भूख हड़ताल?
यह आंदोलन 10 सितंबर को भूख हड़ताल से शुरू हुआ था. मांग थी कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए. लेकिन गृह मंत्रालय का कहना है कि वांगचुक ने भूख हड़ताल के दौरान कई भड़काऊ बयान दिए जिससे भीड़ उग्र हो गई. उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen Z आंदोलन का हवाला देकर युवाओं को उकसाया.
बुधवार को हुई थी हिंसा
बुधवार को करीब सुबह 11:30 बजे प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल स्थल से निकलकर लेह के CEC कार्यालय और एक राजनीतिक दल के दफ्तर पर टूट पड़े. वहां आगजनी की गई, पुलिस वाहन जलाए गए और सुरक्षाकर्मियों पर हमला हुआ. हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी जिसमें कुछ लोग हताहत हुए.
वांगचुक का सोशल मीडिया पर वीडियो
वांगचुक ने बाद में सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि यह Gen Z की क्रांति है. उन्होंने युवाओं की बेरोजगारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी का मुद्दा उठाया लेकिन साथ ही अपील भी की कि हिंसा से उनकी मेहनत बर्बाद न हो.
हिंसक झड़प और भूख हड़ताल खत्म
हालात बिगड़ने के बाद वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी और एम्बुलेंस से गांव लौट गए। गृह मंत्रालय ने उन्हें हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया और लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो शेयर न करें.
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सुलगते सवाल
अब सवाल उठता है कि आंदोलन की मांगें जायज़ थीं लेकिन हिंसा की जिम्मेदारी कौन लेगा? सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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