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सरकार और न्यायपालिका के टकराव के बीच किरेन रिजिजू से छीना कानून मंत्रालय, कॉलेजियम पर उठाए थे सवाल, जानें कब-कब बढ़ी गर्माहट

Law Ministry: पिछले साल किरेन रिजिजू ने कहा था कि न्यायाधीश केवल उन लोगों की नियुक्ति या पदोन्नति की सिफारिश करते हैं, जिन्हें वे जानते हैं, हमेशा सबसे योग्य व्यक्ति की नहीं.

kiren rijiju

किरेन रिजिजू ने छीना गया कानून मंत्रालय

Rahul Singh Edited by Rahul Singh

Kiren Rijiju: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कैबिनेट फेरबदल में अर्जुन राम मेघवाल को नया कानून मंत्री नियुक्त किया है. इसके साथ ही अब किरेन रिजिजू को पृथ्वी विज्ञान में स्थानांतरित कर दिया. मेघवाल की नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण समय में हुई है, जब उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच अक्सर टकराव होता रहा है. रिजिजू का कार्यकाल विवादास्पद था. सरकार और न्यायपालिका के बीच न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कई मतभेद थे.

पिछले साल एक मीडिया कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि न्यायाधीश केवल उन लोगों की नियुक्ति या पदोन्नति की सिफारिश करते हैं, जिन्हें वे जानते हैं, हमेशा सबसे योग्य व्यक्ति की नहीं. साथ ही पिछले साल नवंबर में रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के तंत्र पर हमला करते हुए कहा कि कॉलेजियम प्रणाली संविधान के लिए विदेशी है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार दी थी चुनौती

फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के स्थानांतरण को मंजूरी देने में देरी पर केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि इसका परिणाम प्रशासनिक और न्यायिक दोनों कार्रवाइयां हो सकती हैं, जो सुखद नहीं हो सकती हैं. जस्टिस संजय किशन कौल और अभय एस. ओका की बेंच ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा, हमें कोई स्टैंड न लेने दें, जो बहुत असुविधाजनक होगा. आगे कहा कि यदि न्यायाधीशों के स्थानांतरण को लंबित रखा जाता है तो यह एक गंभीर मुद्दा है.

न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि स्थानांतरण एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इस प्रक्रिया में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने एजी को बताया कि कभी-कभी सरकार इसे रातों-रात कर देती है और कभी-कभी इसमें अधिक समय लग जाता है और इसमें एकरूपता नहीं होती है, और यह भी कहा कि मुख्य न्यायाधीशों के स्थानांतरण भी लंबित हैं.

पीठ ने कहा, हमें एक कठिन निर्णय लेना होगा. हमें कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर न करें और एजी से कहा, जिन्होंने कहा कि अदालत कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर सकती, जो हो रहा है. रिजिजू ने जोर देकर कहा था कि देश संविधान और लोगों की इच्छा के अनुसार शासित होगा.

जनवरी में, रिजिजू ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जजशिप के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित उम्मीदवारों पर रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड ए डब्ल्यू) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईपी) के इनपुट प्रकाशित करना एक गंभीर मुद्दा है.

ई-कोर्ट परियोजना के पुरस्कार विजेताओं के सम्मान समारोह में मीडिया को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति देश के लिए काम कर रहा है, तो वह सोच सकता है कि एक दिन उसकी रॉ और आईबी फाइलें सार्वजनिक की जा सकती हैं. केंद्र सरकार द्वारा सिफारिशों पर की गई आपत्तियों का हवाला देते हुए सार्वजनिक क्षेत्र में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियम के हाल के बयानों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, यह चिंता का विषय है, यह एक गंभीर मुद्दा है और एक दिन मैं इस पर बोलूंगा.

इस साल जनवरी में, शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने अपनी वेबसाइट पर विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायपालिका के लिए कुछ अधिवक्ताओं के नामों को दोहराते हुए संकल्प प्रकाशित किए. शीर्ष अदालत ने उम्मीदवारों पर रॉ और आईबी के इनपुट का हवाला दिया, जिनकी फाइलें केंद्र द्वारा पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को लौटा दी गई थीं.

खुले तौर पर समलैंगिक वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने के संबंध में एक बयान में, कॉलेजियम ने कहा, 11 अप्रैल 2019 और 18 मार्च 2021 के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आर एंड ए डब्ल्यू) के पत्रों से, यह ऐसा प्रतीत होता है कि इस अदालत के कॉलेजियम द्वारा 11 नवंबर 2021 को सौरभ कृपाल के नाम को मंजूरी देने की सिफारिश पर दो आपत्तियां हैं, सौरभ कृपाल का पार्टनर एक स्विस नागरिक है, और वह एक अंतरंग संबंध और अपने यौन अभिविन्यास के बारे में खुला है.

कृपाल के नाम को दोहराते हुए कॉलेजियम ने कहा कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि उम्मीदवार का साथी, जो स्विस नागरिक है, हमारे देश के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करेगा, क्योंकि उसका मूल देश एक मित्र राष्ट्र है। इसमें कहा गया है, संवैधानिक पदों के वर्तमान और पिछले धारकों सहित उच्च पदों पर बैठे कई व्यक्तियों के पति-पत्नी विदेशी नागरिक हैं.

– भारत एक्सप्रेस (ians के साथ)



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