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‘आप दीजिए ना समय…’; जब लोकसभा में अमित शाह और धर्मेंद्र यादव के बीच चली ‘सियासी मुस्कुराहट’, फिर थमाई सुझावों की पोटली

लोकसभा में आज (सोमवार) को नक्सलवाद पर हुई चर्चा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने नक्सल प्रभावित राज्यों की समस्याओं और आदिवासियों के अधिकारों पर जोर दिया. चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने यादव को अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया.

आज (सोमवार) को लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा का मंच गर्म रहा. समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने ना सिर्फ नक्सल प्रभावित राज्यों की समस्याओं को सामने रखा, बल्कि आदिवासियों और वनवासियों के अधिकारों की भी बात की.

धर्मेंद्र यादव अपनी स्पीच के दौरान पन्नों का गुच्छा हाथ में लिए हुए कह रहे थे कि उनके पास बहुत सारे सुझाव हैं, लेकिन समय कम है. इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह अपनी सीट से उठे और चेयर को कहते नजर आए, “आप दीजिए ना समय.” इस पर डिप्टी स्पीकर पैनल की कुमारी शैलजा मुस्कुराईं और धर्मेंद्र यादव को और वक्त मिल गया. सदन में हल्की हंसी भी सुनाई दी, जब किसी सदस्य ने कहा, ’15 मिनट में हो जाएगा.’

धर्मेंद्र यादव ने तुरंत अपनी बात जारी रखते हुए छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की समस्याएं गिनाईं. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का समाधान नीति आयोग और कैग की 2023 की रिपोर्ट में मौजूद है.

आदिवासियों के हक और सम्मान पर जोर

सपा सांसद ने साफ कहा, “आदिवासी हमारे भाई हैं. कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए उन्हें उजाड़ने का प्रयास न किया जाए. उन्हें भी मूलभूत सुविधाओं और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए.” उन्होंने सरकार के दावे को भी चुनौती दी कि नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो गया है. हालांकि, उन्होंने माना कि हाल के वर्षों में इसमें कमी जरूर आई है.

धर्मेंद्र यादव ने 2004 की सोनभद्र घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी. नक्सलियों ने पीएसी जवानों से भरे ट्रक को उड़ा दिया था. लेकिन मुलायम सिंह यादव ने बड़े ऑपरेशन की बजाय संवाद और बातचीत का रास्ता चुना. इसका नतीजा यह हुआ कि हजारों नक्सली आत्मसमर्पण कर गए. यादव ने इसे इसलिए बताया कि यह साबित करता है कि बातचीत और समझौता भी नक्सलवाद को कम कर सकता है.

नक्सल प्रभावित इलाकों की वास्तविक समस्याएं

धर्मेंद्र यादव ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को विस्तार से बताया. तेंदूपत्ता और खनिज संसाधनों की लूट, बच्चों में कुपोषण और ड्रॉपआउट की बढ़ती दर, भूमि विवाद और कल्याणकारी योजनाओं का सही ढंग से ना लागू होना. उन्होंने कहा कि फोर्स काम कर रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान केवल पुलिस या सेना की ताकत से नहीं हो सकता.

सांसद ने यह भी कहा कि पैरामिलिट्री फोर्स को सम्मान मिलना चाहिए. कई बार जवान ऑपरेशन में शहीद होते हैं, लेकिन उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिलता. उन्होंने न्यायालय द्वारा दी गई कुछ शक्तियों का उदाहरण भी दिया, जो सरकार अभी तक लागू नहीं कर रही.

धर्मेंद्र यादव ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में नाटापन, कुपोषण, खराब टीकाकरण, भूमि विवाद और कमजोर कल्याणकारी योजनाओं जैसी समस्याओं का समाधान जरूरी है. उनका जोर था कि आदिवासियों को उनका हक मिले और सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण करके ही कोई नीति बनाई जाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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