Lord Meghnad Desai death: प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, लेखक और ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य Lord मेघनाद देसाई का मंगलवार शाम नई दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, साकेत में निधन हो गया. उनके निधन की खबर सामने आते ही शोक की लहर दौड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया.
Lord मेघनाद देसाई लंबे समय से Elara Capital Group से जुड़े हुए थे और अंतिम समय तक इसके बोर्ड के निदेशक रहे.
पीएम मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि
पीएम मोदी ने Lord मेघनाद देसाई के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने ट्वीट कर कहा,
प्रख्यात विचारक, लेखक और अर्थशास्त्री श्री मेघनाद देसाई जी के निधन से व्यथित हूँ. वे सदैव भारत और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहे. उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हमारी बातचीत, जहाँ उन्होंने अपने बहुमूल्य विचार साझा किए थे, को मैं स्नेहपूर्वक याद करूँगा. उनके परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना. ॐ शांति.
Anguished by the passing away of Shri Meghnad Desai Ji, a distinguished thinker, writer and economist. He always remained connected to India and Indian culture. He also played a role in deepening India-UK ties. Will fondly recall our discussions, where he shared his valuable… pic.twitter.com/q1cv3DAXaw
— Narendra Modi (@narendramodi) July 29, 2025
कौन थे लॉर्ड मेघनाद देसाई?
मशहूर अर्थशास्त्री और ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य मेघनाद देसाई का जन्म गुजरात में हुआ था. लॉर्ड देसाई एक प्रख्यात अर्थशास्त्री, लेखक और राजनीतिज्ञ थे. 84 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली.
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स थे प्रोफेसर
मेघनाद देसाई लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के एमेरिटस प्रोफेसर थे. उन्होंने वहां 1965 से 2003 तक अध्यापन कार्य किया था. लॉर्ड देसाई ने बॉम्बे विश्वविद्यालय से मास्टर्स की थी. इसके बाद वो आगे पढ़ने के लिए 1960 में यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया चले गए. जहां उन्होंने 3 सालों में अपनी पीएचडी पूरी कर ली.
मेघनाद देसाई ने शिक्षा और राजनीति में दिया अहम योगदान
मेघनाद देसाई ने शिक्षा और राजनीति में अहम योगदान दिया था. उन्होंने 1992 में एलएसई में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ग्लोबल गवर्नेंस की स्थापना की थी. 1990 से 1995 तक वो एलएसई के डेवलपमेंट स्टडीज इंस्टीट्यूट के निदेशक रहे. उन्होंने निजी क्षेत्र और मार्क्सवादी अर्थशास्त्र पर प्रभाव से संबंधित विषयों पर रिसर्च किया था. उन्होंने करीब 50 सालों तक शोध किया था.
लॉर्ड देसाई ने पूरे करियर में अर्थशास्त्र, इतिहास और संस्कृति पर कई किताबें लिखी. जिसमें मार्क्स रिवेंज और द रीडिस्कवरी ऑफ इंडिया प्रमुख हैं.
– भारत एक्सप्रेस
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