भारत और फ्रांस की दोस्ती अब एक नए और आधुनिक मोड़ पर पहुंच गई है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अगले महीने भारत की सरजमीं पर कदम रखने जा रहे हैं. गुरुवार को पेरिस में राजनयिकों को संबोधित करते हुए खुद राष्ट्रपति मैक्रों ने इस बात की पुष्टि की. उनका यह दौरा न केवल कूटनीतिक लिहाज से अहम है, बल्कि यह भविष्य की तकनीक यानी ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के मामले में दुनिया की दिशा तय करने वाला साबित होगा.
“पूरी दुनिया पेरिस आई थी, अब मैं भारत जाऊंगा”
मैक्रों ने पिछले साल पेरिस में आयोजित एआई (AI) समिट की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग उनकी कूटनीति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. उन्होंने गर्मजोशी के साथ कहा, “हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाया है. पेरिस शिखर सम्मेलन में पूरी दुनिया एक साथ आई थी और अब इसी सहयोग के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए मैं अगले महीने भारत जाऊंगा.”
19-20 फरवरी को AI समिट
नई दिल्ली 19 और 20 फरवरी को ‘AI-इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026’ की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस ऐतिहासिक सम्मेलन का ऐलान प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस एआई एक्शन समिट के दौरान ही कर दिया था. खास बात यह है कि यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन होगा.
खनिजों पर भी होगी बात
मैक्रों की इस यात्रा का एजेंडा सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है. राष्ट्रपति ने साफ संकेत दिया है कि वे भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को एक अलग स्तर पर ले जाना चाहते हैं. इस दौरे में दुर्लभ खनिज पदार्थों पर सहयोग एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है. आज के समय में सेमीकंडक्टर और बैटरी निर्माण के लिए ये खनिज बेहद जरूरी हैं, और भारत-फ्रांस का साथ इस क्षेत्र में चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगा.
जयशंकर ने भी दिए संबंधों की मजबूती के संकेत
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष ज्यां-नोएल बैरो के साथ मुलाकात में राष्ट्रपति के दौरे की तैयारियों का जायजा लिया था. जयशंकर का मानना है कि भारत और फ्रांस का साथ आना सिर्फ दो देशों का मिलन नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक-दूसरे के साथ सक्रिय रूप से काम करना हैं. चाहे BRICS हो, जी-7 हो या जी-20, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे की आवाज बनकर उभर रहे हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि भारत और फ्रांस की यह साझेदारी वैश्विक राजनीति को स्थिरता प्रदान करती है. भारत सरकार इस हाई-प्रोफाइल दौरे की तैयारियों में जोरों-शोरों से जुटी है. माना जा रहा है कि डिफेंस और स्पेस सेक्टर के बाद अब AI और क्रिटिकल मिनरल्स भारत-फ्रांस दोस्ती के नए ‘पिलर्स’ बनने जा रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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