भारतीय शास्त्रीय नृत्य के एक भव्य समारोह में ममता फरसैया की पहली कथक प्रस्तुति ‘मंच प्रवेश’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह कार्यक्रम इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में गौतम बुद्ध नगर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई.
मंच प्रवेश में ममता फरसैया ने अपनी पहली कथक प्रस्तुति देकर गौरव का अनुभव किया. पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज जी की सबसे वरिष्ठ शिष्या विदुषी सरस्वती सेन की शिष्या ममता ने गुरु-शिष्य परंपरा की विरासत को खूबसूरती से आगे बढ़ाया. उनका प्रदर्शन शास्त्रीय कला के प्रति एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी और उनकी नृत्य यात्रा में एक प्रमुख मील का पत्थर था.

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गणेश वंदना से हुई, जिसने उसके बाद की प्रस्तुतियों के लिए आध्यात्मिक माहौल तैयार किया. ममता ने भावपूर्ण और तकनीकी रूप से समृद्ध कथक रचनाओं की एक श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसमें लय, ताल और भाव का बेहतरीन मिश्रण था. प्रत्येक खंड का दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया, जिससे पूरे सभागार में एक विद्युतीय माहौल बन गया.
भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत: सांसद महेश शर्मा
सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा, “भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं. ममता का आज का प्रदर्शन न केवल कौशल का प्रदर्शन था, बल्कि समर्पण और अनुशासन का भी प्रदर्शन था. उनकी यात्रा प्रेरणादायक है, और मैं इस समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं.”
प्रदर्शन के बाद अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए ममता फरसैया ने कहा कि मेरा सपना सच हो गया है.
ममता फरसैया ने कहा,
“पेशेवर मंच पर यह मेरा पहला अनुभव था और ऐसा लगा जैसे कोई सपना सच हो गया हो. कथक मेरे अस्तित्व की आत्मा है और आज मुझे जो गर्मजोशी और प्रशंसा मिली, वह मेरे दिल में हमेशा के लिए छपी रहेगी.”
इस कार्यक्रम में व्हीलचेयर क्रिकेट इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भारद्वाज, दिल्ली-एनसीआर के प्रसिद्ध कलाकार, गुरु और सांस्कृतिक संरक्षक सहित एक प्रतिष्ठित सभा ने भाग लिया. दर्शकों ने सर्वसम्मति से ममता को भारतीय शास्त्रीय नृत्य समुदाय में एक होनहार नई प्रतिभा के रूप में सराहा और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं.
-भारत एक्सप्रेस
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