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अब जुबान पर होनी चाहिए मराठी! ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए आई नई आफत, मराठी टेस्ट बना ‘परमिट की चाबी’

Maharashtra auto taxi rules: महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा टेस्ट अनिवार्य कर दिया है. इस नियम के तहत ड्राइवरों को मराठी बोलना और लिखना आना जरूरी होगा, वरना उनका परमिट रद्द किया जा सकता है.

Maharashtra auto taxi

Maharashtra auto taxi rules

रिपोर्ट- आंचल तिवारी


Maharashtra auto taxi rules: महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का टेस्ट अनिवार्य करने का फैसला लिया है. अब ड्राइवरों को परमिट तभी मिलेगा, जब वे मराठी भाषा बोल और लिख सकेंगे. अगर कोई ड्राइवर इस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो उसे परमिट नहीं दिया जाएगा और मौजूदा परमिट भी रद्द किया जा सकता है.

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह कदम राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उठाया है. दरअसल, मीरा भायंदर से बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिकायत दी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि हाल के समय में कई प्रवासियों को बिना सही जांच के जल्दबाजी में परमिट दे दिए गए. इसी के बाद सरकार ने इस पूरे मामले की समीक्षा शुरू की.

कैसे होगी प्रक्रिया?

अब सभी ड्राइवरों को अपने दस्तावेजों की जांच करवानी होगी. इसके साथ ही उन्हें मराठी भाषा की परीक्षा भी देनी पड़ेगी. जांच पूरी होने के बाद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा. फिलहाल इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा. इसके नतीजों के आधार पर बाद में इसे पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है.

ड्राइवरों की क्या है चिंता?

सरकार के इस फैसले को लेकर ऑटो और टैक्सी चालकों में चिंता है. उनका कहना है कि अगर सरकार को ऐसा नियम लागू करना था, तो पहले करना चाहिए था. अब अचानक परमिट रद्द करने से उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. साथ ही, कई ड्राइवरों ने गाड़ियों के लिए लोन लिया हुआ है, जिसे चुकाना मुश्किल हो सकता है.

कितने लोग होंगे प्रभावित?

मुंबई और आसपास के इलाकों में करीब 2.5 लाख ऑटो रिक्शा परमिट और लगभग 20 हजार टैक्सी परमिट हैं. इनसे करीब 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में यह संख्या लगभग 4 लाख ड्राइवरों तक पहुंचती है, जो अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं.


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आगे क्या?

अगर सरकार इस योजना को पूरी तरह लागू करती है और परमिट रद्द किए जाते हैं, तो हजारों ड्राइवरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है. वहीं सरकार का कहना है कि इस कदम से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय भाषा को बढ़ावा मिलेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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