Matthew VanDyke NIA Arrest
Matthew VanDyke NIA Arrest: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पिछले महीने कोलकाता एयरपोर्ट से 6 यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था. अब इन लोगों को 30 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से पहले ये NIA की कस्टडी में थे, जहां इनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आए इन 7 लोगों में से एक व्यक्ति ऐसा है जिसपर सबसे ज्यादा नजर है. इसकी पहचान मैथ्यू आरोन वैन डाइक के रूप में हुई है. मैथ्यू की पहचान अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों से जुड़ी रही है.
इन सभी पर आरोप है कि ये सभी लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उनका भारत आने का उद्वेश्य अलग था. आरोप है कि वे मिजोरम म्यांमार सीमा पार कर म्यांमार के भीतर सक्रिय जातीय विद्रोही समूहों के संपर्क में थे और उन्हें ड्रोन आधारित युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे.
गिरफ्तार हुए इन सात लोगों में से एक व्यक्ति Matthew Aaron VanDyke भी है. अमेरिकी नागरिक वैन डाइक की पहचान अंतरराष्ट्रीय संघर्ष क्षेत्रों से जुड़ी रही है. जिसके बाद यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया है.

खुद को कहता है फिल्ममेकर
वैन डाइक खुद को फिल्ममेकर, सुरक्षा विश्लेषक और स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाला बताते हैं, लेकिन कई लोग उनकी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. उनपर मर्केनरी (भाड़े का लड़ाका) और निजी सैन्य प्रशिक्षक होने के आरोप लगते रहे हैं. वैन डाइक Sons of Liberty International नामक एक संगठन का संस्थापक है, जो कथित तौर पर दुनिया के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में स्थानीय समूहों को प्रशिक्षण देता है.
अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से जुड़ा रहा अतीत
वैन डाइक पहली बार 2011 के Libyan Civil War के दौरान सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन तानाशाह Muammar Gaddafi के खिलाफ विद्रोहियों का साथ दिया था. इस दौरान उन्हें गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था और कई महीनों तक हिरासत में रखा था.
बाद में उन्होंने सीरिया के संघर्ष पर आधारित डॉक्यूमेंट्री Not Anymore: A Story of Revolution भी बनाई, हालांकि वहां उनकी भूमिका को लेकर भी विवाद रहे.
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भारत के लिए क्यों गंभीर है मामला?
वैन डाइक का सैन्य इतिहास को देखते हुए यह मामला सिर्फ अवैध गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा संकेत भी है. गिरफ्तार किये गए इन आरोपियों पर आरोप है कि ये म्यांमार में जाकर वहां के उग्रवादियों को सैन्य प्रशिक्षण दे रहे थे. पूर्वोत्तर भारत पहले से ही उग्रवाद से जूझ रहा है. म्यांमार सीमा पर सुरक्षा हालात काफी गंभीर है. इसलिए इतनी संवेदनशील इलाकों में उग्रवादियों के पास ड्रोन तकनीक का होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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