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मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ शॉर्ट सर्किट, बिना सवालों के हॉल से बाहर निकलीं

मायावती की जन्मदिन वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हॉल में शॉर्ट सर्किट से अफरा-तफरी मच गई. धुएं के चलते मायावती बिना मीडिया सवालों के जवाब दिए बीच में ही बाहर निकल गईं.

Mayawati PC on Birthday: बहुजन समाज पार्टी(BSP) सुप्रीमो मायावती का आज जन्मदिन है. जन्मदिन के अवसर पर वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने बसपा कार्यालय पहुंची थीं, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कॉन्फ्रेंस हॉल में एक शॉर्ट सर्किट हो गया. इसी दौरान धुएं के कारण हॉल में अफरा-तफरी मच गई, जिसके चलते मायावती ने मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना ही हॉल छोड़ दिया.

जन्मदिन के मौके पर पीसी का आयोजन(Mayawati birthday)

बता दें कि गुरुवार को मायावती का जन्मदिन है. जिसके चलते वह कार्यालय में अपने जन्मदिन के मौके पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंची थीं. इस अवसर पर उन्होंने अपनी पार्टी की उपलब्धियों और आगामी चुनावों में पार्टी की रणनीतियों के बारे में चर्चा की. लेकिन इस चर्चा के बीच में ही शॉर्ट सर्किट की घटना हुई. जिसके चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में रोकना पड़ा.

जानिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्या हुआ?

दरअसल मायावती की पीसी के दौरान, हॉल में अचानक धुआं निकलने लगा. जिसके बाद अग्निशामक यंत्र का उपयोग किया गया. जिसके चलते मायावती को प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही खत्म करना पड़ा और बिना मीडिया से सवालों के जवाब दिए हॉल से निकलना पड़ा. यह स्थिति सभी उपस्थित व्यक्तियों के लिए एक असामान्य अनुभव रही.

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ब्राह्मणों को लेकर क्या बोलीं?

मायावती ने एक बार फिर ब्राह्मणों पर दांव चल दिया. उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को किसी का बाटी-चोखा नहीं खाना चाहिए. समाज पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए BSP की सरकार जरूरी है. ब्राह्मण समाज के विधायकों की बैठक में ब्राह्मणों की उपेक्षा हम हमने चिंता व्यक्त की. हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया है. उन्हें बीजेपी, समाजवादी पार्टी या कांग्रेस के बहकावे में नहीं आना चाहिए. जब ​​BSP की सरकार बनेगी, तो ब्राह्मणों को पूरा सम्मान मिलेगा, क्षत्रिय समुदाय का भी ध्यान रखा जाएगा, और जाट समुदाय पर भी ध्यान दिया जाएगा. दलितों और अल्पसंख्यकों का भी हमेशा की तरह ध्यान रखा जाएगा.

पहले भी ब्राह्मणों के सहारे जीती थीं मायावती

2007 में उत्तरप्रदेश की 86 विधानसभा सीट पर मायावती ने ब्राह्मण उम्मीदवारों को खड़ा किया था. इसे उनकी “सोशल इंजीनियरिंग” का उत्तम उदाहरण माना जाता है . वहीं BSP का चुनाव निशान हाथी दलितों से जुड़ा था. जिसके बाद पार्टी का नया नारा बन गया कि ब्राह्मण शंख बजाएगा, और हाथी आगे बढ़ेगा. साथ ही उन्होंने कहा था कि हाथी सिर्फ एक जानवर नहीं है, यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश है. बता दें कि उनकी यह रणनीति इतना काम कर गई कि बीएसपी के टिकट पर 41 ब्राह्मण उम्मीदवार जीते. प्रदेश में मायावती ने बहुमत वाली सरकार बन गई. इसी को देखते हुए अब मायावती अपने पुराने एक्सपेरिमेंट को दोहराने की कोशिश करती दिख रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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