पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार को हुए एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान माहौल पूरी तरह से उत्साह और हलचल से भरा नजर आया. भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और भी खास बना दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती समेत कई बड़े चेहरे इस मौके पर पहुंचे.
मिथुन चक्रवर्ती का दिखा अलग अंदाज
इस पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस शख्स की हुई, वो फिल्म अभिनेता और नेता मिथुन चक्रवर्ती थे. उनका लुक और उनका व्यवहार दोनों ही लोगों का ध्यान खींचते रहे. उन्होंने कुर्ता-पायजामा के साथ गले में शॉल और सिर पर लाल रंग की टोपी पहन रखी थी, जो उन्हें भीड़ में अलग ही पहचान दे रही थी.
मंच पर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अभिवादन किया और उनके पैर छूने की कोशिश की. हालांकि राजनाथ सिंह ने उन्हें तुरंत रोक दिया और मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया. इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने गृह मंत्री अमित शाह से गर्मजोशी से गले मिलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यह पल कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
नेताओं से मुलाकात और सम्मान का भाव
इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने एक-एक कर कई नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने नितिन नवीन से हाथ मिलाया और चंद्रबाबू नायडू से मिलने के दौरान उनके पैर छूने की कोशिश भी की, लेकिन नायडू ने उन्हें रोकते हुए मुस्कुराकर हाथ मिलाया.
आगे बढ़ते हुए उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की. योगी आदित्यनाथ के पैर छूने का उनका यह अंदाज़ भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उन्होंने गर्मजोशी से गले मिलकर अभिवादन किया.
जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई लोग मिथुन चक्रवर्ती के इस व्यवहार को उनके संस्कार और विनम्रता से जोड़कर देख रहे हैं. समर्थकों का कहना है कि यह भारतीय परंपरा में बड़ों के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है, जो आज भी कई लोग निभाते हैं.
राजनीतिक सफर पर एक नजर
मिथुन चक्रवर्ती ने साल 2014 में राजनीति में कदम रखा था, जब वे तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद बने. उन्होंने संसद में पश्चिम बंगाल और सामाजिक मुद्दों को उठाया, लेकिन 2016 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वे कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर रहे.
हालांकि 2021 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और तब से वे पार्टी के कई कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से नजर आते रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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