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5652 गांव और 1.47 करोड़ लोग; रेलवे के इस मेगा प्रोजेक्ट से कैसे बदलेगी बंगाल-झारखंड की तस्वीर? मोदी कैबिनेट ने ₹4,474 करोड़ को मंजूरी दी

PM Modi Cabinet: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बंगाल और झारखंड में ₹4,474 करोड़ के दो रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिससे 1.47 करोड़ की आबादी को लाभ होगा.

PM Modi Cabinet

PM Modi Cabinet: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) की बैठक में देश में रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए पश्चिम बंगाल और झारखंड में दो बड़े मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 4,474 करोड़ रुपये बताई गई है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

पश्चिम बंगाल और झारखंड को बड़ा लाभ

स्वीकृत परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं. इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुल पांच जिलों को सीधा लाभ मिलेगा. इसके साथ ही भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 192 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन जुड़ जाएगी, जिससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी.

5,652 गांवों को मिलेगी रेल कनेक्टिविटी

सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इनके पूरा होने के बाद लगभग 5,652 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी. इन गांवों की कुल आबादी करीब 1.47 करोड़ है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को परिवहन की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी. बेहतर रेल संपर्क से क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और स्थानीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

पर्यटन स्थलों पर जाना आसान हुआ

इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान हो जाएगी. इनमें बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य और रामेश्वर कुंड जैसे स्थान शामिल हैं. बेहतर रेल नेटवर्क से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है.

रेलवे क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही में सुधार होगा और भीड़भाड़ कम होगी. सरकार का कहना है कि ये मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं ट्रेनों के संचालन को सुव्यवस्थित करने और माल तथा यात्री दोनों तरह के परिवहन को बेहतर बनाने में मदद करेंगी.


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इससे लॉजिस्टिक्स लागत होगी कम

सीसीईए (CCEA) के अनुसार ये परियोजनाएं “नए भारत” के निर्माण के विजन के अनुरूप हैं. इनके माध्यम से क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास का लाभ मिलेगा और रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. साथ ही कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा-इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल और कंटेनरों जैसे माल के परिवहन में भी आसानी होगी.

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलेगी और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में भी सकारात्मक योगदान मिलेगा. ये सभी योजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना है.

-भारत एक्सप्रेस



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