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Caste Census को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब मुख्य जनगणना में ही होगी जातियों की गणना

वर्षों की राजनीतिक बहस के बाद केंद्र सरकार ने जाति जनगणना को मुख्य जनगणना का हिस्सा बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिससे सामाजिक न्याय और सटीक नीति निर्माण को बल मिलेगा.

Caste Census
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

जाति जनगणना (Caste Census) भारत की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय रहा है. एक ओर जहां विपक्षी दल इसे सामाजिक न्याय का मुद्दा बताते आ रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे कई बार अनावश्यक और विभाजनकारी कहकर टालता रहा है. आजादी के बाद से अब तक जातियों की गणना को लेकर बार-बार चर्चा तो हुई, लेकिन इसे कभी मुख्य जनगणना का हिस्सा नहीं बनाया गया.

अब इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि आगामी जनगणना में जातियों की गणना को औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक निर्णय को मंजूरी दी गई. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इसकी जानकारी दी और कहा कि यह फैसला देश की सामाजिक संरचना को समझने और न्यायपूर्ण नीतियों के निर्माण में मदद करेगा.

कांग्रेस पर सीधा हमला

अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आजादी के बाद से अब तक किसी भी जनगणना में जातियों की गणना नहीं की गई. उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से कांग्रेस सरकारों ने जाति जनगणना से परहेज किया, और इसके स्थान पर केवल जाति सर्वेक्षण (survey) कराए गए, जो न तो पूर्ण थे और न ही पारदर्शी.

उन्होंने यह भी बताया कि 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि इस पर विचार होगा, लेकिन बाद में कांग्रेस ने इसे केवल सर्वेक्षण तक सीमित रखा. उस समय SECC (Socio-Economic and Caste Census) नामक एक सर्वे कराया गया था, जिसे जाति जनगणना के विकल्प के रूप में पेश किया गया.

कई राज्यों ने अपने स्तर पर जातियों की गणना के लिए सर्वेक्षण कराए, लेकिन इनमें से कुछ राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे और पारदर्शिता की कमी के कारण समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई. वैष्णव ने कहा कि इससे सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा और जातिगत आंकड़ों को लेकर अविश्वास की भावना फैली.

अब मुख्य जनगणना में शामिल होगी जाति गणना

केंद्र सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि जाति आधारित आंकड़ों को किसी स्वतंत्र सर्वे के माध्यम से नहीं, बल्कि मुख्य जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर ही जुटाया जाएगा. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इससे समाज को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी और नीतिगत फैसले ज्यादा सटीक और न्यायपूर्ण हो सकेंगे.

उन्होंने आगे कहा कि जब गरीब सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था, तब भी समाज में कोई बड़ा विरोध या तनाव देखने को नहीं मिला. उसी तरह जाति जनगणना को भी सकारात्मक नजरिये से देखा जाना चाहिए.


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-भारत एक्सप्रेस



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