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फ्रांस में सुगिता ताकाइची से मिले पीएम मोदी: बुलेट ट्रेन से लेकर डिफेंस टेक तक, भारत-जापान के बीच क्या हुई डील?

फ्रांस में G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सुगिता ताकाइची के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई. दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर और इंडो-पैसिफिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया.

Modi-Takaichi Meet: फ्रांस के खूबसूरत पहाड़ी रिसॉर्ट इवियन-ले-बैन्स में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक धमक लगातार चरम पर है. ब्रिटेन, अमेरिका और यूएई के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की नवनिर्वाचित और ऐतिहासिक प्रधानमंत्री सुगिता ताकाइची (Sanae Takaichi) के साथ एक बेहद उच्च स्तरीय और रणनीतिक द्विपक्षीय बैठक की है.

17 जून 2026 को हुई इस महा-मुलाकात में दोनों देशों ने अपनी ‘विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी’ (Special Strategic and Global Partnership) को एक बिल्कुल नए और अभूतपूर्व युग में ले जाने का संकल्प लिया है, जिसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन जैसी विस्तारवादी ताकतों की नींद उड़ा दी है.

 

जापानी भाषा में पीएम मोदी का कड़क ट्वीट

इस ऐतिहासिक मुलाकात के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर विशेष रूप से जापानी भाषा में पोस्ट लिखकर दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. पीएम मोदी ने दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों को रेखांकित करते हुए लिखा कि भारत और जापान व्यापार, निवेश, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सहित विविध क्षेत्रों में आपसी सहयोग के संबंधों को लगातार गहरा करते रहेंगे. पीएम मोदी का यह जापानी पोस्ट सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया और इसे जापानी जनता के प्रति भारत के गहरे सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.

टेक्नोलॉजी का नया महा-चक्रव्यूह

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत और जापान व्यापार एवं निवेश को अपना सबसे बड़ा प्राथमिकता क्षेत्र मानते हैं. दोनों नेताओं के बीच हाई-एंड टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, साइबर सुरक्षा, रक्षा तकनीक (Defense Tech), सेमी-हाई स्पीड रेल और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद गंभीर चर्चा हुई. भारत और जापान एशिया के दो सबसे बड़े और मजबूत लोकतंत्र हैं, जो न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में बल्कि वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना करने में भी एक-दूसरे के सबसे विश्वसनीय और पक्के साझेदार साबित हुए हैं.

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इंडो-पैसिफिक की स्थिरता पर महा-मंथन

इस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता रहा. दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच दोनों दिग्गजों ने कसम खाई कि वे एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय कानून का पुरजोर समर्थन करेंगे.

इस महा-समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग और रणनीतिक रिश्तों को एक नए रॉकेट जैसी रफ्तार मिलने जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे एशिया-पैसिफिक रीजन की भू-राजनीति (Geopolitics) को पूरी तरह बदल कर रख देगी.

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-भारत एक्सप्रेस

 



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