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मुंबई में चेक हो रहे ऑटो वालों के बोल: 15 सवालों के साथ बताएं आती है मराठी?

Mumbai Marathi Test: मुंबई में RTO ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों की मराठी समझ जांचना शुरू किया है. 15 सवालों से व्यावहारिक भाषा ज्ञान परखा जा रहा है.

Mumbai Auto Taxi

मुंबई में ऑटो वालों की मराठी भाषा चेकिंग हो रही

Auto Taxi Drivers Marathi Test: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रही मुहिम अब सड़कों तक पहुंच गई है. राज्य के कई RTO कार्यालयों ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की मराठी समझ की जांच शुरू कर दी है. गुरुवार (20 अगस्त) से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत अधिकारी चालकों से आमने-सामने बातचीत कर यह देख रहे हैं कि वे यात्रियों से मराठी में रोजमर्रा की बातचीत कर पाते हैं या नहीं.

मुंबई के दादर ईस्ट में भी RTO अधिकारियों ने कई ड्राइवरों से बातचीत की. जांच के दौरान टैक्सी चालक इजहार मोहम्मद को एक महीने के भीतर मराठी सीखने का नोटिस दिया गया. इजहार ने कहा कि उन्हें बुनियादी मराठी आती है और वह इसे और बेहतर तरीके से सीखने की कोशिश करेंगे. एक अन्य चालक ने कहा कि वह रोजमर्रा की मराठी समझते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति को भाषा बोलने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

पेपर नहीं, बातचीत से होगी परीक्षा

RTO की यह जांच किसी लिखित भाषा परीक्षा जैसी नहीं है. अधिकारियों के पास 15 सवालों वाला एक पेपर है, लेकिन सवालों का मकसद ड्राइवर की व्यावहारिक समझ परखना है. मसलन, यात्री को किसी जगह जाना हो तो रास्ते, दूरी और वहां पहुंचने में लगने वाले समय से जुड़े सवाल मराठी में पूछे जाते हैं.

RTO इंस्पेक्टर एस. सुत्रावे के मुताबिक, यात्रियों को सेवा देने वाले वाहन चालकों के लिए मराठी की सामान्य समझ जरूरी है. पूरी जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी. जो चालक मराठी सीखने से इनकार करेंगे या तय समय में जरूरी स्तर हासिल नहीं कर पाएंगे, उनके बैज को तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है. लगातार नियमों का पालन न करने पर बैज और परमिट रद्द करने की कार्रवाई भी संभव है.

पहले ट्रेनिंग, अब जांच

सरकार ने यह अभियान करीब एक महीने पहले ही शुरू कर दिया था. 18 अगस्त को ठाणे में आयोजित कार्यक्रम में बताया गया कि लगभग 1.25 लाख चालकों ने मराठी प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाणपत्र हासिल किया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, 105 दिनों के अभियान में करीब 1.65 लाख चालकों को मराठी का प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र दिया जा चुका है.


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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अभियान के दौरान कहा था कि मराठी मजबूरी नहीं, बल्कि लगाव और सम्मान की भाषा है. अब RTO की जांच शुरू होने से साफ है कि सरकार प्रशिक्षण के बाद इसके अमल की दिशा में भी आगे बढ़ रही है.

-भारत एक्सप्रेस



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