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‘एथेनॉल नहीं, कुछ और ही है खेल…अचानक क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम? सरकार ने खुद बताया सच

चीनी के दाम 48 से बढ़कर 56 रुपये किलो तक पहुंचने के बाद एथेनॉल को इसकी वजह बताया जा रहा था, लेकिन सरकार ने इसे खारिज किया है. खाद्य मंत्रालय के मुताबिक उत्पादन में कमी और मिलों द्वारा बढ़ाई गई कीमतें तेजी की मुख्य वजह हैं.

Sugar Price Hike

चीनी के दाम क्यों बढ़े?-ai generated image

Sugar Price Hike Reason: रसोई का बजट बिगाड़ने के लिए अब चीनी के दामों ने ऐसा तगड़ा उछाल मारा है कि आम आदमी के मुंह का स्वाद ही कड़वा हो गया है! महज 15 दिनों के भीतर चीनी के रेट 48 रुपये से सीधे 56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए, जिससे हाहाकार मच गया. बाजार में ये अफवाह आग की तरह फैली कि एथेनॉल बनाने के चक्कर में देश में चीनी कम पड़ गई है. लेकिन अब मोदी सरकार के खाद्य मंत्रालय ने मैदान में उतरकर इस पूरे मामले का सच सामने रख दिया है.

सरकार ने साफ कह दिया है कि एथेनॉल को दोष देना बंद करो, चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मिलों की इस मनमानी-जमाखोरी पर अब सख्त एक्शन होने वाला है.

एथेनॉल की वजह से बढ़े दाम?

20 जुलाई को जैसे ही चीनी के दाम अचानक 48 रुपये से उछलकर 56 रुपये प्रति किलो पहुंचे, वैसे ही उंगलियां एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पर उठने लगीं. लोगों को लगा कि गाड़ियों का तेल (एथेनॉल) बनाने में सारी चीनी फूंक दी गई. लेकिन खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने साफ किया कि चालू सीजन में कुल उत्पादन में से महज 28 लाख टन चीनी ही एथेनॉल के लिए गई है. यानी एथेनॉल को बलि का बकरा बनाना बिल्कुल गलत है, रेट बढ़ने की असली वजह कुछ और ही है!

37 लाख टन कम हुआ उत्पादन

सरकार ने बताया कि इस बार मौसम और बीमारियों ने गन्ने की फसल पर तगड़ा वार किया है. ‘रेड रॉट’ और ‘टॉप बोरर’ नाम के खतरनाक रोगों के साथ-साथ कई राज्यों में हुई भारी बारिश और जलभराव के कारण गन्ने को भारी नुकसान पहुंचा है. इसी वजह से चीनी का कुल उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन पर सिमट गया है.

हालांकि, राहत की बात यह है कि देश की सालाना घरेलू मांग सिर्फ 280 से 285 लाख टन ही है, यानी देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है!

सरकार ने बताया रेट बढ़ने का असली सच

जब देश में मांग से ज्यादा चीनी मौजूद है, तो फिर दाम क्यों भागे? खाद्य सचिव ने साफ लहजे में कहा कि चीनी मिलों के स्तर पर जो कीमतें 47-48 रुपये से बढ़ाकर 62 रुपये प्रति किलो की गई हैं, वह ‘पूरी तरह अनुचित’ और गैर-जरूरी हैं. यानी मिल मालिकों और बिचौलियों ने मौका देखकर कृत्रिम कमी का माहौल बनाया और कीमतें बढ़ा दीं.

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जमाखोरों पर कसेगा शिकंजा

दामों में आग लगाने वाले जमाखोरों और मुनाफाखोरों का इलाज करने के लिए सरकार ने मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है. एहतियात के तौर पर 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के बिना किसी ड्यूटी (शुल्क-मुक्त) आयात की इजाजत दे दी गई है. इसके साथ ही कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम बनाने वाले बड़े थोक उपभोक्ताओं और बड़े कारोबारियों पर ‘स्टॉक लिमिट’ ठोक दी गई है ताकि कोई माल दबाकर न बैठ सके.

-भारत एक्सप्रेस

 



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