पहाड़ों की रानी मसूरी में छुट्टियों का मजा एक बार फिर ट्रैफिक के भारी टॉर्चर में बदल गया. 2 अक्टूबर की छुट्टी और वीकेंड के मौके पर पहाड़ियों की ओर उमड़ी पर्यटकों की भारी भीड़ के चलते मसूरी-देहरादून मार्ग से लेकर शहर के कोने-कोने में गाड़ियों का लंबा जाम देखने को मिला. आलम यह रहा कि महज 10 से 15 मिनट का सफर तय करने में लोगों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी. चिलचिलाती धूप और रेंगते ट्रैफिक में पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी बेबस नजर आए.
चरमरा जाती है व्यवस्था
मसूरी में छुट्टियां बिताने आने वालों के लिए जाम की समस्या कोई नई बात नहीं है. हर वीकेंड और सरकारी छुट्टी के दिन दिल्ली-एनसीआर समेत पड़ोसी राज्यों से हजारों गाड़ियां यहां पहुंचती हैं. गाड़ियो की इतनी भारी तादाद के आगे पुलिस और प्रशासन के तमाम दावे और ट्रैफिक प्लान धरे के धरे रह जाते हैं. ट्रैफिक पुलिस के जवान रास्तों पर मशक्कत करते जरूर दिखते हैं, लेकिन सड़कों की सीमित चौड़ाई और गाड़ियों की बढ़ती कतार के आगे व्यवस्था पूरी तरह हांफने लगती है.
अवैध पार्किंग और संकरे रास्ते बने बड़ी मुसीबत
मसूरी में ट्रैफिक सुचारू न हो पाने की एक बड़ी वजह पर्याप्त पार्किंग का न होना भी है. पार्किंग की जगह न मिलने पर लोग सड़कों के किनारे ही वाहन खड़े कर देते हैं. इससे चौड़ी सड़कें भी संकरी हो जाती हैं और गाड़ियां एक के पीछे एक रेंगने पर मजबूर हो जाती हैं. ऐसे में वन-वे व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं.
कब मिलेगा स्थायी समाधान?
पर्यटन सीजन और लंबे वीकेंड पर मसूरी में वाहनों का दबाव बढ़ना तय है. ऐसे में सिर्फ कामचलाऊ इंतजामों के भरोसे रहना अब मुमकिन नहीं दिखता. स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले सैलानियों की मांग है कि प्रशासन को इसके लिए एक ठोस और स्थायी ट्रैफिक मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए. अब सवाल यही उठता है कि हर छुट्टी पर सड़कों पर लगने वाले इस ‘ट्रैफिक टॉर्चर’ से लोगों को आखिर कब तक निजात मिलेगी?
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-भारत एक्सप्रेस
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