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‘पूर्व मुखिया निकला चोर’, नवादा के सरकारी दफ्तर से गायब किए दस्तावेज; वीडियो में दिखी करतूत

नवादा जिले के मेसकौर अंचल कार्यालय में सरकारी दस्तावेजों की चोरी का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मेसकौर प्रखंड की बारत पंचायत के पूर्व मुखिया सांगा संजीत उर्फ कन्हैया कुमार बादल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

Nawada government office CCTV video shows act

नवादा जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है. मेसकौर अंचल कार्यालय से सरकारी दस्तावेज चोरी करने के आरोप में एक पूर्व मुखिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले से जुड़ा एक सीसीटीवी वीडियो भी सार्वजनिक किया है, जिसमें कथित तौर पर पूर्व मुखिया को कार्यालय के भीतर फाइल से कागजात निकालते हुए देखा जा सकता है.

सीसीटीवी फुटेज के बाद कार्रवाई

जिला प्रशासन के मुताबिक, मेसकौर अंचल कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच के दौरान यह मामला सामने आया. फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक व्यक्ति फाइल खोलकर उसमें से कुछ कागजात निकालता है और उन्हें मोड़कर अपने पास रख लेता है. वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की पहचान मेसकौर प्रखंड की बारत पंचायत के पूर्व मुखिया सांगा संजीत उर्फ कन्हैया कुमार बादल के रूप में की गई है.

फुटेज की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मेसकौर थाना में पूर्व मुखिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा से कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होगी.

प्रशासन का सख्त रुख

जिला प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी दफ्तरों में रखे दस्तावेज जनता की संपत्ति होते हैं और इनके साथ छेड़छाड़ या चोरी एक गंभीर अपराध है. प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और यदि इसमें कोई और व्यक्ति या अधिकारी शामिल पाया गया, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी.

पूर्व मुखिया का पलटवार

वीडियो सामने आने के बाद पूर्व मुखिया ने भी अपना पक्ष रखा है. उन्होंने खुद पर लगे चोरी के आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है. उनका कहना है कि यह मामला जमीन से जुड़ा हुआ है और अंचल कार्यालय के कुछ अधिकारियों पर उन्होंने पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. पूर्व मुखिया का दावा है कि उन्हीं आरोपों के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है और प्रशासनिक मिलीभगत के चलते उन्हें बदनाम किया जा रहा है. पूर्व मुखिया ने यह भी कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं और इस पूरे मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

इस घटना के बाद नवादा की राजनीति भी गरमा गई है. एक तरफ प्रशासन वीडियो के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पूर्व जनप्रतिनिधि इसे साजिश बता रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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