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विकसित भारत की बुनियाद: NCMEI और तमिलनाडु के राज्यपाल ने अल्पसंख्यक संस्थानों को राष्ट्रीय एकता का स्तंभ बताया

विकसित भारत के निर्माण में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने लोक भवन, चेन्नई में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को औपचारिक रूप से सौंपी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट।

चेन्नई, 3 अगस्त, 2026 – राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा आयोग (NCMEI) के सदस्य प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने आज लोक भवन में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को आयोग की वार्षिक रिपोर्ट औपचारिक रूप से सौंपी। यह महत्वपूर्ण बैठक, जिसमें शिक्षा और राष्ट्र निर्माण पर गहन विचार-विमर्श हुआ, एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन से पहले आयोजित की गई, जिसमें राज्यपाल आर्लेकर मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने वाले हैं।

शिक्षा में राष्ट्रीय चेतना का समावेश होना अत्यंत ज़रूरी

बी.एस. अब्दुर रहमान क्रेसेंट इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “एकता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की भूमिका: विकसित भारत @ 2047” का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल आर्लेकर ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि देश की मूल चेतना हर पाठ्यक्रम और सिलेबस में झलकनी चाहिए। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा, “हम सब इस मिट्टी, इस देश और इस संस्कृति के हैं। हम पराए नहीं हैं, हम विदेशी नहीं हैं। हमारा शिक्षा तंत्र इसी सोच और इसी चेतना के अनुरूप होना चाहिए।” राज्यपाल ने संस्थानों से नौकरी ढूंढ़ने वालों (जॉब-सीकर्स) की बजाय नौकरी देने वालों (जॉब-गिवर्स) को तैयार करने का आह्वान किया और आत्मनिर्भरता व नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्यमिता विकास प्रकोष्ठ स्थापित करने पर विशेष ज़ोर दिया। उनका यह दूरगामी दृष्टिकोण विकसित भारत @ 2047 के महत्वाकांक्षी रोडमैप से पूरी तरह हम-आहंग है – जो आज़ादी की शताब्दी तक भारत को एक संपूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प है।

अल्पसंख्यक संस्थान: समावेशी तरक़्क़ी के प्रमुख आधार

प्रोफ़ेसर शाहिद अख्त़र, जो NCMEI के कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं, ने आयोग की उल्लेखनीय न्यायिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आयोग ने देश भर में 14,364 संस्थानों को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जा प्रदान किया है, जिनमें से 1,175 अकेले तमिलनाडु में हैं। इन संस्थानों की समावेशी तासीर का सबसे बड़ा सबूत यह है कि इनमें पढ़ने वाले 68 प्रतिशत से अधिक छात्र उस अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं हैं, जिसके द्वारा इन्हें संचालित किया जाता है। प्रोफ़ेसर अख्त़र ने पहले भी इस बात पर ज़ोर दिया है कि, “स्वायत्तता और राष्ट्रीय एकीकरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। हमारे संस्थानों को शिक्षा और नवाचार में उत्कृष्टता हासिल करनी चाहिए, ताकि वे सीधे विकसित भारत 2047 के मिशन में अपना भरपूर योगदान दे सकें।”

विकसित भारत @ 2047: एक मुश्तरक़ा सपना

इस सम्मेलन ने एक सशक्त मंच प्रदान किया, जहां इस बात पर गहन मंथन हुआ कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान किस तरह सामाजिक समरसता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और न्यायसंगत विकास के इंजन का काम कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विकसित भारत @ 2047 का सपना तभी साकार हो सकता है, जब गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और न्यायसंगत शिक्षा समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। प्रोफ़ेसर अख्त़र हमेशा से इस बात के पुरज़ोर समर्थक रहे हैं कि शिक्षा में नैतिक नेतृत्व, आलोचनात्मक सोच और भारत की बहुलवादी परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थी सिर्फ़ करियर के लिए ही नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए भी पूरी तरह तैयार हो सकें।

आगे का सफ़र: शिक्षा के ज़रिए राष्ट्र निर्माण की अटूट प्रतिबद्धता

NCMEI और तमिलनाडु राजभवन के बीच यह सहयोगात्मक कवायद राष्ट्र की शैक्षणिक नींव को मज़बूत करने की एक साझा प्रतिबद्धता को साफ़ दर्शाती है। जैसे-जैसे भारत अपनी आज़ादी की शताब्दी की ओर तेज़ी से अग्रसर है, एकता को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विविधता को संजोए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने में अल्पसंख्यक संस्थानों की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है। वार्षिक रिपोर्ट औपचारिक रूप से प्रस्तुत कर दी गई है और कल के राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए मंच तैयार है – ऐसे में शिक्षा और तरक्की पर यह संवाद और अधिक गति पकड़ेगा। यह पूरे तौर पर इस बात को बल देता है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान भारत की एक समृद्ध, मज़बूत और एकजुट भविष्य की यात्रा में अपरिहार्य और भरोसेमंद साझीदार हैं।

—- भारत एक्सप्रेस



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