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निशांत कुमार की ‘अग्निपरीक्षा’! JDU में एंट्री के साथ मिलीं 5 चुनौतियां; टूटेगा चक्रव्यूह या बिखरेगी पार्टी?

Nishant Kumar Political Challenges: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के साथ ही उनके इकलौते पुत्र निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री हो गई है. उन्होंने जेडीयू की सदस्यता तो ले ली, लेकिन उनके सामने चुनौतियों का एक हिमालय खड़ा है.

Nishant Kumar Political Challenges

Nishant Kumar Political Challenges: बिहार की राजनीति में दशकों तक अपनी धमक बनाए रखने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा का रुख कर एक नए सियासी युग का शंखनाद कर दिया है. अपनी पूरी राजनीतिक पारी में परिवारवाद के घोर विरोधी रहे नीतीश के इस कदम ने न सिर्फ विपक्ष को, बल्कि खुद उनकी पार्टी के कैडर को भी चौंका दिया है. रविवार, 8 मार्च को वरिष्ठ नेताओं संजय झा और ललन सिंह की मौजूदगी में उनके 50 वर्षीय इकलौते बेटे निशांत कुमार ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) की सदस्यता ग्रहण कर ली. लेकिन, एक ‘लो-प्रोफाइल’ इंजीनियर से सक्रिय राजनेता बनने का यह रातों-रात हुआ बदलाव किसी भी मायने में आसान नहीं होने वाला है.

निशांत (Nitish Kumar Son Nishant Kumar) के लिए जेडीयू में औपचारिक एंट्री लेना भले ही आसान रहा हो, लेकिन अब उनके सामने चुनौतियों का एक ऐसा हिमालय खड़ा है जिसे पार करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निशांत अपने पिता की उस भारी-भरकम राजनीतिक विरासत को संभाल पाएंगे, या फिर यह दांव बिहार के जटिल राजनीतिक अखाड़े में जेडीयू के लिए भारी पड़ेगा?

नेतृत्व का शून्य और ‘अस्तित्व’ का संकट

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद जेडीयू में सबसे बड़ी चुनौती ‘बॉस’ की कमी है. वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी और प्रेम कुमार मणि जैसे जानकारों का मानना है कि जेडीयू में नीतीश के बाद ऐसा कोई नेता नहीं है जो पूरी पार्टी को एक सूत्र में पिरोकर रख सके. निशांत के सामने चुनौती यह होगी कि क्या वे नीतीश कुमार के जाने के बाद पार्टी में पैदा हुए खालीपन को भर पाएंगे या पार्टी बीजेपी और आरजेडी के बीच बंटकर बिखर जाएगी.

‘वंशवाद’ के आरोपों का तीखा प्रहार

निशांत की एंट्री के साथ ही जेडीयू पर ‘वंशवाद’ का ठप्पा लग गया है. अब तक नीतीश कुमार लालू यादव और मुलायम सिंह यादव के परिवारों पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे थे. अब वही आरोप निशांत पर लगेंगे. प्रेम कुमार मणि इसे ‘कबायली सोच’ और ‘जातिवादी गणित’ बता रहे हैं. विरोधियों के इन हमलों के बीच खुद को एक योग्य नेता साबित करना निशांत के लिए अग्निपरीक्षा होगी.

राजनीतिक अनुभव और विचारधारा

निशांत पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक पूरी तरह ‘लो-प्रोफाइल’ रहे हैं. उनके पास न तो छात्र राजनीति का अनुभव है और न ही उन्होंने कभी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच काम किया है. शिवानंद तिवारी का तर्क है कि जहाँ अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को उनके पिताओं ने सालों तक प्रशिक्षित किया, वहीं निशांत को अचानक मैदान में उतार दिया गया है. बिना किसी राजनीतिक समझ और स्पष्ट विचारधारा के वे मंझे हुए राजनेताओं का मुकाबला कैसे करेंगे, यह बड़ा सवाल है.

कार्यकर्ताओं का रोष और जनता का भरोसा

नीतीश कुमार के अचानक पीछे हटने से जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और असमंजस है. कार्यकर्ताओं को डर है कि नीतीश के बिना पार्टी की राजनीतिक दिशा भटक सकती है. निशांत कुमार ने ऐलान तो किया है कि वे पूरे बिहार का दौरा करेंगे, लेकिन क्या वे आम जनता और पुराने समाजवादियों का भरोसा जीत पाएंगे? क्या वे नीतीश कुमार की उस विरासत को संभाल पाएंगे जो उन्होंने दो दशकों के संघर्ष से खड़ी की है?

2030 का लक्ष्य और गठबंधन की राजनीति

वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि जेडीयू को बचाने के लिए निशांत ही आखिरी उम्मीद हैं. उनके सामने 2030 के विधानसभा चुनाव तक पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने की भारी जिम्मेदारी है. गठबंधन की राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखना उनके लिए सबसे कठिन कार्य होगा.

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देखना होगा क्या कर पाते हैं निशांत? (Nitish Kumar Leadership)

निशांत कुमार की यह राजनीतिक शुरुआत महज़ एक नेता के बेटे की लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि यह जेडीयू के भविष्य और उसके राजनीतिक वजूद को बचाने की एक बड़ी जद्दोजहद है. 2030 के विधानसभा चुनावों तक पार्टी को बिखरने से रोकना, भाजपा जैसे मजबूत सहयोगी के सामने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखना और विरोधियों के ‘परिवारवाद’ वाले तीखे प्रहारों का जवाब देना. ये सब निशांत के लिए किसी चक्रव्यूह से कम नहीं हैं. यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि निशांत कुमार पूरे बिहार का दौरा कर जनता और निराश कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत पाएंगे या फिर जेडीयू का दशकों पुराना समाजवादी ताना-बाना इस नए प्रयोग के बोझ तले बिखर जाएगा.



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