Nitin Gadkari Civil Suit
Nitin Gadkari Civil Suit: नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्रों के प्रदर्शन की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना पड़ा. धर्मेंद्र प्रधान के बाद लोग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को निशाने पर ले लिये. उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट डालकर ये दावा किया जा रहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने में उनका हाथ है. इससे उनके परिवार को अरबों का फायदा पहुंचा है. लगातार हो रहे ट्रोलिंग और कथित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाने के मामले में अब नितिन गडकरी बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट, डीपफेक तस्वीरें और वीडियो डाले जा रहे हैं, जिसमें गलत दावा किया जा रहा है कि E20 इतेनॉल ब्लेंडिंग से गडकरी और उनके परिवार को भारी मुनाफा हो रहा है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में बताया कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के सरकार के फैसले में उनका कोई हाथ नहीं है, यह प्रोजेक्ट केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास है.
नितिन गडकरी की याचिका पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके खिलाफ गलत पोस्ट और वीडियो डालने वाले लोगों के खिलाफ सिविल सूट दायर करने की अनुमति दे दी है. इसके बाद यह सवाल पैदा होता है कि आखिर यह सिविल सूट क्या है, और नितिन गडकरी को इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
क्या होता है सिविल सूट?
सिविल सूट को हिंदी में दीवानी मुकदमा कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा मुकदमा होता है, जिसमें किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार के निजी या नागरिक अधिकारों से जुड़े विवाद का हल अदालत से मांगा जाता है.
इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को जेल भेजना नहीं होता. इसमें आमतौर पर अदालत से यह मांग की जाती है कि नुकसान की भरपाई कराई जाए या किसी गलत काम को रोका जाए.
उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की संपत्ति पर कोई कब्जा कर ले, उसका पैसा वापस न करे या उसके खिलाफ झूठी खबर छापकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाए. ऐसे मामले में संबंधित व्यक्ति सिविल सूट दायर कर सकता है.
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 9 के अनुसार सिविल अदालतें उन सभी मामलों की सुनवाई कर सकती हैं, जो सिविल प्रकृति के हों. हालांकि, अगर किसी खास कानून में उस मामले की सुनवाई पर स्पष्ट या अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगाई गई हो, तो सिविल अदालत उस मामले को नहीं सुनेगी.
सिविल सूट में अदालत से क्या मांगा जा सकता है?
इसमें आमतौर पर अदालत से ये राहतें मांगी जाती हैं:
- मानहानि होने पर आर्थिक हर्जाना
- किसी बयान, खबर, प्रकाशन या कार्रवाई पर रोक, जिसे कानूनी भाषा में इंजंक्शन कहा जाता है
- संपत्ति का असली मालिक कौन है, इसका फैसला
- किसी संपत्ति पर कब्जा वापस दिलाना
- अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट का पालन कराना
- कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने पर मुआवजा
- बकाया रकम की वसूली
- किसी दस्तावेज या कार्रवाई को अवैध घोषित कराना
- अदालत से किसी कानूनी अधिकार की औपचारिक घोषणा कराना
सिविल सूट कब दायर किया जा सकता है?
अगर किसी व्यक्ति के निजी या कानूनी अधिकार का उल्लंघन हुआ है, तो वह अपनी निजी हैसियत में सिविल सूट दायर कर सकता है. जैसे,
- उसके खिलाफ झूठे और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप लगाए गए हों
- उसकी निजी संपत्ति को लेकर विवाद हो
- किसी ने उसकी जमीन या मकान पर कब्जा कर लिया हो
- किसी ने उसके साथ किया गया अनुबंध तोड़ दिया हो
- किसी ने उसका बकाया पैसा नहीं लौटाया हो
- उसकी तस्वीर, नाम या निजी सामग्री का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया हो
- वह किसी बयान, खबर या कार्रवाई पर अदालत से इंजंक्शन चाहता हो
नितिन गडकरी को क्यों पड़ी जरूरत?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किये जा रहे हैं, जिसमें एथेनॉल ब्लेंडिंग से उनके परिवार को पहुंच रहा फायदा भी शामिल है. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम नितिन गडकरी ने ही शुरू किया था, ताकि उनके बेटों की कंपनियों को फायदा पहुंच सके. दावों के मुताबिक एथेनॉल ब्लेंडिग की वजह से नितिन गडकरी के बेटों की कंपनियों के शेयरों की कीमत में सैकड़ों प्रतिशत का उछाल आया है. विपक्ष के रुख और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने गडकरी पर प्रेशर को कई गुना बढ़ा दिया है. उन्हें डर है कि आने वाले दिनों में देश में उनके खिलाफ भी कहीं मोर्चा ना खोल दिया जाए. ऐसे में नितिन गडकरी बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ रुख किये हैं.
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अपनी याचिका में उन्होंने बताया कि E20 एथेनॉल पॉलिसी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है, उनके पास सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय है. ऐसे में उनपर लगाये जा रहे ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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