रिपोर्ट-अजय भटनागर
बेहतर भविष्य और अच्छी जिंदगी के लिए विदेश में अच्छी नौकरी का चलन आजकल युवाओं में तेजी से देखा जा रहा है और युवाओं के इसी सपने का लाभ उठाकर कुछ जालसाज चंद रुपयों की खातिर युवाओं की जिंदगी को नर्क बना देते हैं. कुछ इसी तरह का एक मामला (Oman Job Fraud) मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया है, जिसमें फैजान नाम के एक युवक को विदेश में नौकरी के लिए जाना मुशीबत और दर्दनाक साबित हुआ.
दरसल 21 वर्षीय फैजान को ओमान में नौकरी दिलाने के नाम पर न सिर्फ ठगा गया, बल्कि वहां ले जाकर उससे वो काम करवाए गए जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता.
अब घटना के बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं कि-आखिर फैजान के साथ ऐसा हुआ कैसे? कैसे वो विदेश नौकरी के लिए ओमान गया? और वहां उसके साथ ऐसा क्या हुआ जिसके बाद उसके मन में सुसाइड करने जैसा खौफनाक कदम उठाने का ख्याल आया फिर कैसे हुई वतन वापस? भारत एक्सप्रेस के साथ हुई खास चर्चा के आधार पर आइए इस रिपोर्ट में हम इन सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे.
कहां से हुई मामले की शुरुआत?
दरअसल रायसेन जिले के छोटे से गांव गीदगढ़ का रहने वाला फैजान बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है. मदरसे से धार्मिक शिक्षा हासिल करने वाले फैजान पर अपने परिवार का पेट पालने और गरीबी दूर करने की भारी चिंता थी. इसी दौरान भोपाल की एक मस्जिद में उसकी मुलाकात मुजीब नाम के एक शख्स से हुई, जो खुद को मौलाना बताने के साथ-साथ युवाओं को विदेश भेजने वाली एजेंसी का एजेंट भी था.
वहीं मुजीब ने फैजान को झांसा दिया कि ओमान की मस्जिद में इमाम की नौकरी दिलाएगा, जहां 60 से 70 हजार रुपये महीना वेतन मिलेगा. गरीबी मिटाने के चक्कर में फैजान उसकी बातों में आ गया.
मुंबई एयरपोर्ट पर कराया झूठा वीडियो साइन
एजेंट मुजीब ने पासपोर्ट, वीजा और मेडिकल के नाम पर फैजान के परिवार से लगभग 2 लाख रुपये ऐंठ लिए. इसके बाद उसे मुंबई की एक ट्रेवल एजेंसी के हवाले कर दिया गया. मुंबई एयरपोर्ट पर ओमान की फ्लाइट पकड़ने से ठीक पहले एजेंसी के लोगों ने जल्दबाजी में फैजान से कुछ कागजातों पर दस्तखत करवाए और सफाईकर्मी के रूप में जाने का एक वीडियो शूट करा लिया. जब फैजान ने सवाल किया, तो उसे यह कहकर चुप करा दिया गया कि यह केवल विदेश जाने की एक कानूनी औपचारिकता है, अंदर तो तुम्हें इमाम का ही काम करना है.
मस्कट पहुंचते ही टॉर्चर शुरू (Oman Job Fraud)
जैसे ही फैजान ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचा, वहां के असली नर्क की शुरुआत हो गई. कंपनी वालों ने पहुंचते ही सबसे पहले उसका असली पासपोर्ट अपने पास जमा कर लिया. दो दिन ऑफिस में रखने के बाद उसे एक मिनिस्ट्री के दफ्तर में मजदूर की तरह झोंक दिया गया. इमाम बनना तो दूर, फैजान से 30 से 40 कमरों की सफाई, झूठे बर्तन धुलवाने और टॉयलेट तक साफ करवाए जाने लगे. विरोध करने पर खाना तक नहीं दिया जाता था.
अनजान देश में फैजान को कई-कई दिनों तक भूखा रहना पड़ा. जब उसने भोपाल में बैठे एजेंट मुजीब को फोन किया, तो उसने नंबर ब्लॉक कर दिया. भूख, बेबसी और टॉर्चर से तंग आकर फैजान के मन में सुसाइड करने तक का खौफनाक ख्याल आने लगा था.
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ओमान में मिले भारतीय मददगार
इस दर्दनाक दौर में ओमान में मौजूद कुछ सहृदय भारतीयों ने फैजान की मदद की, उसे खाने के पैसे दिए और कुछ दिन अपने घर में पनाह दी. इन्हीं में से एक भारतीय ने भोपाल में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आबिद को फैजान की आपबीती बताई.
बता दें कि अबिद विदेश में फंसे भारतीयों को निकालने का ही काम करते हैं, उन्होंने तुरंत भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रवासी भारतीय शाखा से संपर्क साधा. ओमान स्थित भारतीय दूतावास को अलर्ट किया गया और फैजान की वतन वापसी का कानूनी अभियान शुरू हुआ.
30 जुलाई को हुई वतन वापसी
विदेश मंत्रालय की तत्परता और आबिद के प्रयासों से फैजान बीते 30 जुलाई को सकुशल भारत लौट आया. वतन वापसी के बाद फैजान और उसका परिवार अब एजेंट मुजीब और मुंबई की फ्रॉड एजेंसी के खिलाफ सख्त पुलिस कार्रवाई करने जा रहा है.
इसके अलावा आबिद ने भारत एक्सप्रेस के जरिए युवाओं को सलाह दी है कि विदेश जाने से पहले एजेंसी की प्रामाणिकता जांचें, कभी भी कैश लेनदेन न करें और विदेश पहुंचते ही भारतीय दूतावास में अपना रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं.
-भारत एक्सप्रेस
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