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ऑपरेशन सिंदूर के बाद इतना बदल गया कश्मीर, अब आतंकियों के लिए काल बने ‘विलेज गार्ड्स’, गांवों की कर रहे पहरेदारी

Operation Sindoor Effects On Kashmir: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की हर हलचल को नेस्तनाबूत करने की कवायद शुरू हो गई है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना और सुरक्षाबल, ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ताकि सीमावर्ती गांवों में आतंकी गतिविधियों या घुसपैठ को तुरंत खत्म किया जा सके.

Operation Sindoor Effects On Kashmir

Operation Sindoor Effects On Kashmir

Operation Sindoor Effects On Kashmir: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की हर हलचल को नेस्तनाबूत करने की कवायद शुरू हो गई है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना और सुरक्षाबल, ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ताकि सीमावर्ती गांवों में आतंकी गतिविधियों या घुसपैठ को तुरंत खत्म किया जा सके.

पिछले एक साल में 5 जिलों के 2500 से अधिक विलेज डिफेंस गार्ड्स को प्रशिक्षण दिया गया है. इन प्रशिक्षणों में गार्ड्स को पारंपरिक राइफल की जगह SLR, बुलेटप्रूफ जैकेट और वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस किया गया है. ताकि सीमा और संवेदनशील इलाकों में स्थानीय स्तर पर रक्षा तंत्र को और ज्यादा आधुनिक और सक्रिय बनाया जा सके.

सेना के जवान ग्रामीण इलाकों में 12-12 घंटे की ड्यूटी कर विलेज डिफेंस गार्ड्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं.

राजौरी में कई बार हुई घुसपैठ की कोशिश

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में राजौरी सीमा से कई बार घुसपैठ की कोशिशें की गईं. जिसे विलेज डिफेंस गार्ड्स की मदद से सेना ने समय रहते इन्हें खत्म कर दिया.

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि गांव में अब कोई अजनबी आता है तो लोग उन्हें तुरंत पहचानकर उसकी सूचना पुलिस को दे देते हैं. रात के समय सुरक्षा बलों के साथ विलेज डिफेंस गार्ड्स के जवान पेट्रोलिंग भी करते हैं.

इन इलाकों पर है फोकस

सेना ने पिछले साल दिसंबर से डोडा के कई गांवों में स्पेशल ट्रेनिंग कैंप लगाये और लोगों को ट्रेनिंग दी. इसके अलावा सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे संवेदनशील जगहों पर ट्रेनिंग कैंप लगाकर फॉरेस्ट पेट्रोलिंग, माउंटेन सर्विलांस की ट्रेनिंग दी गई.

सुरक्षा बलों का मेन फोकस दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों पर है. जहां इमरजेंसी सिचुएशन में भी सुरक्षा बलों को पहुंचना बेहद मुश्किल होता है.

आतंकी घटनाओं पर दिख रहा असर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने चाक-चौकसी बढ़ा दी है. जिसका असर अब आतंकी घटनाओं पर दिख रहा है. पिछले साल के मुकाबले इस साल 27.5 प्रतिशत कम आतंकी घटनाएं हुईं.

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पहलगाम हमले से पहले जहां एक साल में आतंकी घटनाओं में 127 लोगों की मौत हुई थी. वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर 92 रह गया है.

-भारत एक्सप्रेस



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