Pakistan On Ram Mandir Dharma Dhwaja: जिस मुल्क में अल्पसंख्यकों का होना ‘गुनाह’ है और जहां ऐतिहासिक शारदा पीठ जैसे मंदिर खंडहर बन चुके हैं. वह पाकिस्तान अब भारत को ‘विरासत’ का पाठ पढ़ाने चला है. 25 नवंबर को पीएम मोदी ने जैसे ही अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्म ध्वजा फहराई, इस्लामाबाद में बैठी सरकार की नींद उड़ गई. खुद के दामन पर कल ही 9 मासूम अफगानी बच्चों के खून के दाग लगे हैं, लेकिन बेशर्मी का आलम देखिए कि पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने ‘इस्लामोफोबिया’ का पुराना और घिसा-पिटा रिकॉर्ड बजाते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) के सामने भारत की शिकायत कर दी है.
अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज की स्थापना पर पाकिस्तान भड़क गया है. अपने देश में हिन्दुओं और ईसाइयों की रक्षा करने में नाकाम रहने वाला पाकिस्तान इस ध्वजारोहण को इस्लामोफोबिया और हेट स्पीच से जोड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का ध्यान आकर्षित कर रहा है.
पाकिस्तान के झूठ का पुलिंदा
पाक के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि इससे भारत में अल्पसंख्यक, खासकर मुस्लिमों की सांस्कृतिक विरासत खतरे में है. जबकि, पाकिस्तान में ही हिन्दू मंदिरों की दशा खराब है, शारदा पीठ, कराची का जागत नाथ मंदिर, रावलपिंडी का मोहन मंदिर जैसे धरोहर विलुप्ति के कगार पर हैं. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे भारत में कथित इस्लामोफोबिया, हेट स्पीच और नफरत पर ध्यान दें और मुस्लिम विरासत की रक्षा करें. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने झूठ का पुलिंदा गढ़ते हुए कहा है कि-
‘यह भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव के एक बड़े पैटर्न और हिंदुत्व की सोच के असर में मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जानबूझकर खत्म करने की कोशिशों को दिखाता है.’
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वाहियात प्रोपेगैंडा का नमूना
पाकिस्तान का यह बयान उसकी हताशा और वाहियात प्रोपेगैंडा का एक और नमूना है. एक तरफ वह भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बने मंदिर को ‘मुस्लिम विरासत पर खतरा’ बताता है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही देश में हिंदुओं और ईसाइयों के जबरन धर्मांतरण और मंदिरों के विलुप्त होने पर चुप्पी साधे रहता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी जानता है कि जो देश आतंकवाद और पड़ोसी मुल्कों (अफगानिस्तान) पर हमलों के लिए कुख्यात हो, उसका ‘मानवाधिकार’ और ‘संस्कृति’ की दुहाई देना सदी का सबसे बड़ा पाखंड है. राम मंदिर की ध्वजा तो फहर गई, लेकिन पाकिस्तान की यह ‘ड्रामेबाजी’ उसकी अपनी ही गिरती साख को और रसातल में ले जा रही है.
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