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कौन है ओलंपियन परगट सिंह, जिनके हाथों में है अब पंजाब कांग्रेस की कमान?

पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. जानिए हॉकी के मैदान से निकलकर सियासत के शिखर तक पहुंचे परगट सिंह की पूरी कहानी.

Pargat Singh Appointed Punjab Congress President Replacing Amarinder Singh Raja Warring

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान और अंदरूनी कलह के बीच पार्टी आलाकमान ने एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है. पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट से लगातार तीन बार के विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

उन्हें अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. जाट सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले परगट सिंह को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का पूरा समर्थन मिला है.

हॉकी के कैप्टन से कैबिनेट मंत्री तक का सफर

5 मार्च 1965 को जालंधर के मीठापुर में जन्मे परगट सिंह भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ियों में शुमार रहे हैं. वे भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रह चुके हैं और उन्होंने 1992 बार्सिलोना तथा 1996 अटलांटा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया.

खेल के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में प्रतिष्ठित पद्म श्री से नवाजा गया. खेल से संन्यास के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस और खेल निदेशक के रूप में भी प्रशासनिक सेवाएं दीं.

अकाली दल से शुरुआत

परगट सिंह का सियासी सफर साल 2012 में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट से चुनाव जीतकर शुरू हुआ था. 2016 में अकाली दल छोड़कर उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ ‘आवाज-ए-पंजाब’ मंच बनाया और बाद में कांग्रेस का हाथ थाम लिया.

2017 और 2022 में भी उन्होंने जालंधर कैंट से अपनी जीत का परचम लहराया. खासकर 2022 की आप (AAP) लहर में भी अपनी सीट बचाए रखना उनकी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना गया. वे चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में शिक्षा और खेल मंत्री भी रह चुके हैं.

चन्नी गुट की बगावत और नई चुनौतियां

परगट सिंह को पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा का बेहद करीबी माना जाता है. राजा वडिंग का कार्यकाल बढ़ाए जाने पर उन्होंने चन्नी गुट के साथ मिलकर खुलकर आलाकमान के फैसले का विरोध किया था. अब गुटबाजी में बंटी पंजाब कांग्रेस को एकजुट करना और नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को संभालना नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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