PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने दिल्ली के दिल्ली हाट में जीआई-टैग उत्पादों की 3 दिवसीय प्रदर्शनी और सम्मेलन का आयोजन किया. इस प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत के विभिन्न राज्यों को अपने विशिष्ट जीआई-टैग उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच पर लाना है, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं.
इस प्रदर्शनी के माध्यम से कारीगरों, उत्पादकों और उद्यमियों को खरीदारों, नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों से जुड़ने का एक उत्कृष्ट अवसर मिल रहा है. यह कार्यक्रम न केवल भारत के विभिन्न जीआई-टैग उत्पादों के प्रचार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कारीगरों और उत्पादकों को व्यापारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.
जीआई-टैग उत्पादों का महत्व
भौगोलिक संकेत (GI) एक ऐसा लेबल है जिसका उपयोग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले उत्पादों की पहचान के लिए किया जाता है. इन उत्पादों में कुछ अद्वितीय गुण, प्रतिष्ठा या विशेषताएँ होती हैं, जो विशिष्ट रूप से उनके मूल स्थान से जुड़ी होती हैं. जीआई-टैग किए गए उत्पाद उपभोक्ताओं को प्रामाणिकता और गुणवत्ता की गारंटी देने में मदद करते हैं.
PHDCCI के चेयरमैन विनोद करवा ने इस अवसर पर बताया, “जीआई-टैग उत्पाद भारतीय संस्कृति, कला और पारंपरिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं. इन उत्पादों को जीआई टैग मिलने से न केवल उनकी वैश्विक पहचान मजबूत होती है, बल्कि इससे उत्पादकों को अपने उत्पादों की शुद्धता और गुणवत्ता का प्रमाण मिलता है.”
बौद्धिक संपत्ति संरक्षण के रूप में जीआई का महत्व
इसके अतिरिक्त, जीआई टैग उत्पादकों को बौद्धिक संपत्ति संरक्षण का एक रूप प्रदान करता है, जिससे अन्य लोग इन उत्पादों के लिए उसी उत्पत्ति का झूठा दावा नहीं कर सकते. यह किसानों, कारीगरों और उत्पादकों के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित मार्ग खोलता है, जो उन्हें अपने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके व्यापार को बढ़ाने में मदद करता है.
भारत में जीआई-टैग वाले उत्पादों की बढ़ती संख्या
वर्तमान में, भारत में 31 मार्च 2024 तक कुल 635 जीआई-टैग वाले उत्पाद हैं. इन उत्पादों में कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प, कला के सामान, खाद्य उत्पाद और अन्य उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं. जीआई-टैग के माध्यम से इन उत्पादों की पहचान और मूल्य बढ़ी है, जिससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी इनकी मांग बढ़ी है.
जीआई-टैग उत्पादों की यह प्रदर्शनी और सम्मेलन न केवल भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह कारीगरों, उत्पादकों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलता है. यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है.
-भारत एक्सप्रेस
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