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भारत एक्सप्रेस


Special Parliament Sessio: सितंबर के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें तेज हैं. सूत्रों के मुताबिक परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव एजेंडे में हो सकते हैं.

UPI Transactions: भारत सरकार ने 2000 रुपये तक के UPI और RuPay Debit Card भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है. यह कदम छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा की डिजिटल खरीदारी को बढ़ावा देने के साथ UPI के नए आर्थिक मॉडल की ओर इशारा करता है.

India China Trade Imbalance: BRICS की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद कोई आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि मोदी-शी संवाद हो सकता है. 2020 के गलवान संकट के बाद भारत-चीन संबंधों में जो अविश्वास पैदा हुआ, उसने सिर्फ सीमा को प्रभावित नहीं किया, बल्कि व्यापार, निवेश, वीजा, आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक संबंधों पर भी असर डाला, लेकिन अब दोनों देशों ने धीरे-धीरे संवाद बहाल करने के संकेत दिए हैं.

गलवान संकट से लेकर गाजा और तेहरान तक, BRICS शिखर सम्मेलन यह साबित कर रहा है कि यह ब्लॉक अब पश्चिम के आर्थिक और रणनीतिक दबदबे का एक नया और असरदार जवाब बन रहा है.

BRICS शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित बैठक पर दुनिया की नजरें टिकी हैं. यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की नई शुरुआत बन सकती है.

दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन होगा. सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.

BRICS Currency: यह सवाल कि क्या ब्रिक्स एक आम मुद्रा बनाएगा, सुर्खियों में आने की संभावना है, क्योंकि समूह इस महीने नई दिल्ली में अपने शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहा है. लेकिन भारत पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है कि यह एक अलग ब्रिक्स मुद्रा के निर्माण का समर्थन नहीं करता है.

भारत वैश्विक उपभोग की राजधानी बनने की राह पर है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2034 तक देश की खपत दोगुनी हो जाएगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी. बढ़ती बचत और खर्च की प्रवृत्ति इस बदलाव को आगे बढ़ा रही है.

केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू करेगी. इसमें सरकारी कर्मचारियों को 18.5% सरकारी अंशदान मिलेगा, जिससे 23 लाख कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा.

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति और रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार पर संरक्षणवाद के प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है. विशेषज्ञ इसे अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम मानते हैं.