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जब पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति को दिया ‘देसी चीज़’ और कश्मीरी कला का अनूठा तोहफा, जानिए क्या है खास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को भारत की समृद्ध विरासत और नई पहचान को दर्शाते हुए दो बेहद खास तोहफे भेंट किए. इन तोहफों में भारत में बनी अवॉर्ड विनिंग चीज़ और कश्मीर की सदियों पुरानी काष्ठ शिल्प कला की झलक देखने को मिली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को ऐसे तोहफे दिए, जिनमें भारत की पुरानी विरासत और बदलती पहचान दोनों की झलक दिखाई देती है. इन उपहारों में एक तरफ भारत में तैयार की गई अवॉर्ड जीत चुकी चीज़ शामिल थी, तो दूसरी ओर कश्मीर की मशहूर लकड़ी पर नक्काशी की कला को दर्शाने वाला खूबसूरत वॉल पैनल था.

स्विट्जरलैंड को दुनिया भर में चीज़ बनाने के लिए जाना जाता है. ऐसे में भारतीय चीज़ को उपहार के तौर पर देना अपने आप में खास संदेश रखता है. पीएम मोदी की ओर से दिए गए चीज़ के इस कलेक्शन में देश के तीन अलग-अलग हिस्सों कश्मीर, ओडिशा और महाराष्ट्र की झलक देखने को मिली.

कश्मीर की ब्री चीज़ ने जीता है बड़ा अवॉर्ड

गुलमर्ग की फ्रेंच-स्टाइल ब्री चीज़ इस कलेक्शन का खास हिस्सा है. यह दिल के आकार में तैयार की जाती है और इसकी बनावट काफी मुलायम और क्रीमी होती है. इसे पाश्चुरीकृत गाय के दूध से बनाया जाता है. ऊपर से इसका रंग बर्फ जैसा सफेद दिखाई देता है, जबकि स्वाद में मिट्टी और मशरूम जैसी हल्की खुशबू महसूस होती है.

इस चीज़ की खास बात यह भी है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है. 2026 में ब्राजील में आयोजित ‘मुन्जियाल दो केजियो दो ब्राजील’ यानी वर्ल्ड चीज़ अवॉर्ड्स में इसे सुपर गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.

कोणार्क की चीज़ में देसी अंदाज

ओडिशा के कोणार्क से आई फ्रेंच टॉमी-स्टाइल चीज़ का स्वाद और अंदाज थोड़ा अलग है. इसकी बाहरी परत प्राकृतिक होती है और अंदर से यह काफी मुलायम रहती है. स्वाद में नमकीन और हल्की चटपटी झलक मिलती है. खास बात यह है कि चीज़ मुंह में घुलने के बाद अंत में हल्का-सा नींबू जैसा स्वाद छोड़ती है.

इसे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरस्कार मिल चुके हैं. 2023 में नॉर्वे में हुए वर्ल्ड चीज़ अवॉर्ड्स में इसे गोल्ड मेडल मिला था. इसके बाद 2025 में स्विट्जरलैंड में आयोजित प्रतियोगिता में इसे सिल्वर मेडल से नवाजा गया.

येऊर की चीज़ में स्विस ग्रुयेरे की झलक

महाराष्ट्र के येऊर की माउंटेन-स्टाइल चीज़ भी इस खास तोहफे का हिस्सा है. इसे स्विट्जरलैंड की मशहूर ग्रुयेरे चीज़ से प्रेरित होकर तैयार किया जाता है. इसे बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है, क्योंकि करीब 8 से 9 महीने तक इसे पकने दिया जाता है.

इतने लंबे समय तक पकने के कारण इसमें नटी, हल्का मीठा और हर्बल स्वाद विकसित होता है. इसकी बाहरी सतह पर गुलाब की पंखुड़ियों और सौंफ की सजावट की जाती है, जो इसे भारतीय और अल्पाइन परंपराओं का अनोखा मेल देती है. इसे खास तौर पर फोंड्यू और ग्रिल्ड डिशेज में इस्तेमाल करने के लिए अच्छा माना जाता है.

कश्मीर की लकड़ी पर सदियों पुरानी कहानी

चीज़ के साथ पीएम मोदी ने कश्मीरी अखरोट की लकड़ी से बना हाथ से नक्काशी किया हुआ वॉल पैनल भी भेंट किया. यह सिर्फ सजावट की चीज़ नहीं, बल्कि कश्मीर की सदियों पुरानी लकड़ी पर नक्काशी की परंपरा को सामने लाने वाला शिल्प है.

प्रीमियम हिमालयी अखरोट की लकड़ी से तैयार इस पैनल पर बेहद बारीकी से नक्काशी की गई है. इसमें पारंपरिक कश्मीरी जीवन के कई रंग दिखाई देते हैं—फूल-पत्तियों से लेकर इंसानी आकृतियां, घोड़े, बग्घियां और गांव के रोजमर्रा के दृश्य तक इसमें उकेरे गए हैं.

इस कला में स्थानीय परंपराओं के साथ मध्य एशियाई प्रभाव की भी झलक मिलती है. पैनल इस बात को दिखाता है कि कश्मीरी कारीगरों ने पीढ़ियों से लकड़ी को सिर्फ एक सामग्री नहीं, बल्कि कला का रूप देने की परंपरा को कैसे संभालकर रखा है.

गुजरात की कारीगरी भी उपहारों में शामिल

पीएम मोदी की ओर से राष्ट्रपति कैरोलिन पार्मेलिन को गुजरात की कला और हस्तशिल्प से जुड़े उपहार भी दिए गए. इनमें कच्छी शॉल और सादेली बॉक्स शामिल हैं.

कच्छी शॉल अपने रंग-बिरंगे हाथ से बुने कपड़े और ज्यामितीय डिजाइनों के लिए पहचानी जाती है. वहीं, सूरत का सादेली बॉक्स अपनी बारीक सजावटी कारीगरी के लिए मशहूर है. इसमें अलग-अलग सामग्रियों को बेहद सावधानी से जोड़कर और परतों में सजाकर ज्यामितीय पैटर्न तैयार किए जाते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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