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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर एक पावन वैदिक मंत्र साझा किया है. इस सुभाषित के जरिए पीएम मोदी ने समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जो लोगों के हृदयों को आपस में जोड़ें और एक-दूसरे के प्रति अगाध स्नेह को बढ़ावा दें.
पीएम मोदी ने शेयर किया अथर्ववेद का मंत्र
प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर “सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः. अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥” मंत्र शेयर किया गया है. यह वैदिक मंत्र अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र है. इसका हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को ऐसे काम करने चाहिए जो दिल में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव को बढ़ाएं. सभी को एक-दूसरे के प्रति उसी प्रकार से आत्मीयता रखनी चाहिए, जैसे कोई गाय अपने नवजात बछड़े से निस्वार्थ प्रेम करती है.
सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः।
अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥ pic.twitter.com/yXtOZGM2jz
— Narendra Modi (@narendramodi) September 15, 2026
द्वेष और ईर्ष्या मिटाने की प्रेरणा
इस मंत्र के माध्यम से ईश्वर कहते हैं, “हे मनुष्यो! मैं तुम्हारे बीच ऐसे वचनों और कर्मों की स्थापना करता हूं जिससे तुम सहृदय (एक जैसा हृदय रखने वाले), सांमनस्य (समान मन वाले), और अविद्वेष (द्वेष या ईर्ष्या से रहित) बनो.” पीएम मोदी ने इस सुभाषित के जरिए संदेश दिया कि समाज और राष्ट्र में मतभेदों को भुलाकर सभी को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास होना चाहिए.
समझाया निस्वार्थ प्रेम का मर्म
इस मंत्र में गाय और बछड़े के उदाहरण से बेहद खूबसूरती से समझाया गया है कि जैसे गाय बिना किसी स्वार्थ और शर्त के अपने नवजात बछड़े से प्रेम करती है, वैसे ही मनुष्यों को भी आपस में प्रेम करना चाहिए. इस वैदिक प्रार्थना का मूल सार यही है कि समाज के हर व्यक्ति का उद्देश्य और विचार एक-दूसरे के हित में हो, जिससे देश में शांति और भाईचारा बना रहे.
-भारत एक्सप्रेस
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