PM Modi Sanskrit Shlok Today: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिदिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्राचीन सनातन परंपरा से जुड़े प्रेरणादायक ‘सुभाषित’ और संस्कृत श्लोक साझा कर देशवासियों को नई ऊर्जा और सही राह दिखाने का काम कर रहे हैं. इसी क्रम में उन्होंने गुरुवार को एक अलौकिक श्लोक साझा करते हुए पूरे देश से अपनी पवित्र मातृभूमि की निस्वार्थ सेवा करने और राष्ट्र-निर्माण में समर्पित रहने का कड़क संदेश दिया है.
बताते चलें पीएम मोदी द्वारा शेयर किए गए इन प्राचीन मंत्रों और उनके गूढ़ हिंदी अर्थ को सोशल मीडिया पर देश के युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है.
विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्।
शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥ pic.twitter.com/jjaeiNMgvJ
— Narendra Modi (@narendramodi) August 6, 2026
जानिए पीएम स्वर शेयर श्लोक का अर्थ(PM Modi Sanskrit Shlok Today)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को श्लोक साझा करते हुए लिखा कि “विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्. शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥” इस पवित्र संस्कृत श्लोक का गहरा हिंदी अर्थ है कि जिस धरती पर हर प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियां और जीवनदायिनी औषधियां पैदा होती हैं, वह हमारी पृथ्वी माता विस्तृत और हमेशा स्थिर रहे.
विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे महान सद्गुणों से पालित-पोषित, सबका कल्याण करने वाली और जीवन के समस्त सुख-साधनों को प्रदान करने वाली अपनी इस मातृभूमि की हम सभी को सदैव पूरे मन से सेवा करनी चाहिए.
ये भी पढ़ें: धरे गए JPSC घोटाले के ‘मुन्ना भाई’! लखनऊ से रांची तक CID का भौकाल, 20 लोगों की गिरफ़्तारी
‘निरंतर प्रयास ही जीवन की सच्ची नीति’
इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं में आत्मिक विकास और ज्ञान की महत्ता रेखांकित करते हुए श्लोक पोस्ट किए थे. बुधवार को उन्होंने कहा था कि आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और देश को आगे ले जाने की भावना जगाता है. उन्होंने श्लोक के माध्यम से समझाया कि खुद का उत्थान करना और निरंतर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्ची नीति है. इसी ध्येय को आधार बनाकर गुणी लोग समाज में सकारात्मक योगदान देते हैं.
वहीं मंगलवार को उन्होंने गीता के प्रसिद्ध श्लोक “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” का हवाला देकर बताया कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है और निरंतर साधना से ही इंसान का अंतःकरण शुद्ध होता है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


