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‘जहां ये 6 गुण होते हैं, वहां दैव भी साथ देता है’, पीएम मोदी ने शेयर किया खास संस्कृत श्लोक

PM Modi Subhashitam: पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर परिश्रम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम को सफलता के लिए जरूरी छह गुण बताया. जानिए श्लोक का सरल अर्थ.

PM Modi Sanskrit Shloka

पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा किया

PM Modi Subhashitam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (29 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मेहनत, साहस और धैर्य जैसे गुणों को सफलता की कुंजी बताया गया है. पीएम मोदी ने अपने संदेश के जरिए लोगों को याद दिलाया कि केवल किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय इंसान को अपने कर्म और पुरुषार्थ पर भरोसा रखना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने लिखा संस्कृत श्लोक है- “उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः. षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत्॥”

इसका सरल अर्थ है कि जिस व्यक्ति में परिश्रम करने की इच्छा, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम जैसे छह गुण मौजूद होते हैं, वहां ईश्वर भी उसकी सहायता करते हैं. यानी सफलता के लिए मेहनत और सही दिशा में प्रयास सबसे जरूरी हैं.

मेहनत के साथ जरूरी हैं ये छह गुण

इस सुभाषित में सबसे पहले उद्यम यानी मेहनत को महत्व दिया गया है. इसका संदेश साफ है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए खुद प्रयास करना जरूरी है. इसके बाद साहस की बात आती है. जीवन में नई चुनौतियां और जोखिम सामने आएं तो उनसे घबराने के बजाय उनका सामना करने का हौसला होना चाहिए.

धैर्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है. मुश्किल परिस्थितियों में जल्दबाजी करने के बजाय संयम बनाए रखना जरूरी होता है. वहीं बुद्धि का अर्थ है सही समय पर सही फैसला लेने और समस्याओं का हल खोजने की क्षमता.

इसके साथ शक्ति और पराक्रम भी सफलता के लिए जरूरी बताए गए हैं. किसी काम को पूरा करने के लिए शारीरिक और मानसिक क्षमता के साथ पूरी ऊर्जा लगानी पड़ती है. रास्ते में आने वाली बाधाओं से मुकाबला करने का जज्बा भी इसी का हिस्सा है.


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भाग्य से पहले पुरुषार्थ का संदेश

प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह पारंपरिक संस्कृत सुभाषित लोगों को कर्म और आत्मविश्वास का संदेश देता है. इसका मूल भाव यही है कि इंसान अगर पूरी मेहनत, समझदारी और साहस के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो परिस्थितियां भी उसके पक्ष में बन सकती हैं.

यानी सफलता की शुरुआत अपने प्रयास से होती है. भाग्य या दैवीय सहायता की उम्मीद करने से पहले जरूरी है कि व्यक्ति खुद अपने हिस्से की मेहनत और जिम्मेदारी पूरी करे.

-भारत एक्सप्रेस



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