PM Modi Shiv Puran Shlok: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दर्शन, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपनी मुहिम के तहत आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक बेहद गहन और दार्शनिक संदेश साझा किया है. प्रधानमंत्री ने शिव पुराण के वायवीय संहिता से लिए गए एक बेहद पवित्र और ज्ञानवर्धक संस्कृत श्लोक को देशवासियों के साथ साझा किया, जो सीधे तौर पर सृष्टि के मूल सिद्धांत और शक्ति की व्याख्या करता है.
पीएम मोदी की ओर से सुबह-सुबह साझा किए गए इस आध्यात्मिक विचार ने सोशल मीडिया पर आते ही भारी चर्चा बटोर ली है और लोग इस गहन संदेश को आधुनिक जीवन के नजरिए से जोड़कर देख रहे हैं.
प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते।
प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥ pic.twitter.com/jjLE20617F
— Narendra Modi (@narendramodi) July 14, 2026
शिव पुराण का वो अद्भुत श्लोक(PM Modi Shiv Puran Shlok)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस श्लोक को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया है, वह है: “प्रभया हि विना यद्वद् भानुरेष न विद्यते. प्रभा च भानुना तेन सुतरां तदुपाश्रया॥” इस श्लोक के गूढ़ और गहरे भावार्थ को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जिस प्रकार सूर्य को उसके अपने प्रकाश (प्रभा) के बिना देखा या महसूस नहीं किया जा सकता, ठीक उसी प्रकार प्रकाश भी सूर्य के बिना अपने स्वतंत्र अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता.
सीधे शब्दों में कहें तो सूर्य और उसकी चमक का संपूर्ण अस्तित्व तथा उनकी असीम शक्ति एक-दूसरे पर पूरी तरह से आश्रित और समर्पित है. यह श्लोक मुख्य रूप से ब्रह्मांड की परम सत्ता यानी ‘शक्ति’ और उस शक्ति को धारण करने वाले ‘शक्तिमान’ के अविभाज्य और अटूट संबंध को बहुत ही सरल रूप में परिभाषित करता है.
मनमोहक वीडियो के साथ ‘सुभाषितम्’ का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पवित्र श्लोक को सिर्फ शब्दों में ही नहीं लिखा, बल्कि इसे एक बेहद आकर्षक और दिल को छू लेने वाले वीडियो के साथ साझा किया है. इस वीडियो के बैकग्राउंड में देश के भव्य मंदिर, अलौकिक सूर्योदय और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों का ऐसा ताना-बाना बुना गया है, जो सीधे मन को शांति देता है.
वीडियो में श्लोक का संस्कृत उच्चारण होने के साथ-साथ दर्शकों की सहूलियत के लिए उसका हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद भी बेहद कड़क अंदाज में प्रस्तुत किया गया है. पीएम मोदी ने इसे “सुभाषितम्” (यानी एक सुंदर और श्रेष्ठ विचार) के रूप में चिह्नित किया है. यह अनूठी प्रस्तुति भारतीय दर्शन और सनातनी मूल्यों को आज की नई पीढ़ी के अनुकूल और समझने योग्य बनाने का एक बहुत बड़ा जरिया बनकर उभरी है.
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आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर चमकाने का अभियान
सोशल मीडिया पर इस सुभाषितम् के आते ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं और युवा वर्ग ने इसे हाथों-हाथ लिया है. राजनीतिक विश्लेषकों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम उनके उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत वे भारत की प्राचीन विरासत और आध्यात्मिक ज्ञान को कूटनीति और शासन के साथ जोड़ते रहे हैं.
चाहे योग को वैश्विक मंच पर पहुंचाना हो या फिर समय-समय पर हमारे प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान से दुनिया को रूबरू कराना, पीएम मोदी हमेशा यह संदेश देते हैं कि भारत की असली ताकत उसके इसी आध्यात्मिक और दार्शनिक चिंतन में छिपी है. शिव पुराण का यह श्लोक भी आज के दौर में यह सीख देता है कि समाज और शासन में नेतृत्व और जनता का संबंध भी सूर्य और उसके प्रकाश की तरह ही अटूट होना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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