राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल हुईं. हालांकि, उनके लिए व्यवस्थाओं का अभाव पाया गया. इस पर पीएम मोदी ने कहा कि सम्मेलन के लिए जगह बदलकर एक छोटी और भीड़भाड़ वाली जगह चुनी गई, जबकि पास में बड़ा मैदान था, जहां 5 लाख लोग आसानी से इकट्ठा हो सकते थे. इससे बहुत से संथाल समुदाय के लोग सम्मेलन में नहीं पहुंच पाए.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रशासन ने ऐसा क्यों किया, यह समझ नहीं आता. उन्होंने ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों के न आने पर भी दुख जताया और कहा कि वे बंगाल की बेटी हैं, ममता दीदी उनकी छोटी बहन हैं.
This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrT
— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
पीएम मोदी ने कहा- ये शर्मनाक
राष्ट्रपति के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा. पीएम ने इसे शर्मनाक और अभूतपूर्व बताया. उन्होंने ट्वीट में कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले सभी लोग निराश हैं. राष्ट्रपति, जो खुद आदिवासी समुदाय से हैं, के दर्द ने पूरे देश को दुखी कर दिया है. पीएम ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने राष्ट्रपति का अपमान किया है.
संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी गरिमा हमेशा बरकरार रहनी चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में बेहतर समझ बनेगी. यह घटना आदिवासी संस्कृति और राष्ट्रपति पद के सम्मान से जुड़ी है, जिस पर सभी को गंभीरता से सोचना चाहिए.
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